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कुछ लोग सोशल मीडिया पर भ्रम फैला रहे हैं... मणिकर्णिका घाट विवाद पर बोले सीएम योगी

सीएम योगी ने कहा कि शवों को जलाने के बाद उड़ने वाले राख की वजह से गंगा के पानी का सीओडी स्तर बढ़ जाता है। डोम समुदाय को हजारों सालों से कर रहा है. उनके सम्मान में कोई दिक्कत ना हो, उसमें शवदाह की प्रक्रिया को उनको ध्यान में रखते इकोफ्रेंडली बनाने की कोशिश है।

कुछ लोग सोशल मीडिया पर भ्रम फैला रहे हैं... मणिकर्णिका घाट विवाद पर बोले सीएम योगी
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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 17 जनवरी (शनिवार) को वाराणसी के दौरे पर पहुंचे। सीएम योगी का ये वाराणसी दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। सीएम योगी का ये दौरा उस वक्त हो रहा है जब काशी में मणिकर्णिका घाट को लेकर विवाद चल रहा है। अपने दौरे के दौरान सीएम योगी ने इस विवाद को लेकर भी टिप्पणी की।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग काशी के विरासत को हमेशा बदनाम करते हैं, कुछ लोग काशी को लेकर लगातार साजिश कर रहे हैं। यहां जो विकास कार्य हो रहे हैं उसे लेकर भी तरह-तरह के भ्रण फैलाए जा रहे हैं। भ्रम फैलाने के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि काशी के घाटों पर धार्मिक संस्कारों में बिना हस्तक्षेप के किया जा सके, इसके लिए काम कराये जा रहे हैं। इस काम में लगी संस्थाओं को सरकार सहयोग कर रही है। अंतिम संस्कार करने जाने वालों को सहूलियत देने के लिए विकास की योजना चल रही है। शोक में आए लोगों को दुर्व्यवस्था का शिकार होना पड़ता है।

कई बार तो अधजला शव देखा जाता है, जानवर शवों को नोचते हैं, कभी घाट पर पानी भरा रहता है। ऐसे में 16 संस्कारों में से एक अंतिम संस्कार को सम्मानपूर्वक पूरा करने के लिए यहां विकास कराना जरूरी है। यहां फिलहाल उसी के लिए काम चल रहा है। सीएम योगी ने आगे कहा कि दाह संस्कार में कोई हस्तक्षेप ना हो, इसको ध्यान में रखकर घाटों का विकास कराया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर परोसा जा रहा है भ्रम

सीएम योगी ने कहा कि काशी में चल रहा विकास कार्य कई लोगों के गले नहीं उतर रहा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया में झूठी तस्वीरें डालकर जनता को गुमराह करने का काम किया जा रहा है। ये विकास के काम में बाधा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर जीवन की अंतिम यात्रा का विसर्जन करने के लिए सदियों से लोग आते हैं।

इन घाटों पर जाकर स्थिति देखकर वहां की हालत को समझा जा सकता है। अंतिम विदाई सम्मानजनक ढंग से मिलनी चाहिए लेकिन वो नहीं हो पा रहा था। ऐसे में इन घाटों को विकसित करने के लिए सीएसआर फंड से काम किया जा रहा है। इस काम को देखकर बदनाम करने की साजिश शुरू हो गई है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज होगा विकास

शवों को जलाने के बाद उड़ने वाले राख की वजह से गंगा के पानी का सीओडी स्तर बढ़ जाता है। डोम समुदाय को हजारों सालों से कर रहा है। उनके सम्मान में कोई दिक्कत ना हो, उसमें शवदाह की प्रक्रिया को उनको ध्यान में रखते इकोफ्रेंडली बनाने की कोशिश है। साथ ही इसमें तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

खुले और कवर्ड दाह संस्कार क्षेत्र का निर्माण चल रहा है। एक प्लेटफार्म इतनी ऊपर बनाया जाएगा, जहां तक गंगा का पानी नहीं आ सकता है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की ही तरह मणिकर्णिका घाट का निर्माण किया जा रहा है। इसमें वेटिंग रूम, टॉयलेट, चेकिंग रूम, रैंप, ड्रेनेज, वेस्ट मैनेजमेंट का प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहा है। लोकमान्य अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को संरक्षित किया गया है और निर्माण का काम पूरा होने के बाद प्रतिमा को वापस स्थापित किया जाएगा।


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