शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह का पति नरेंद्र मरावी से तलाक, 5 साल से थीं अलग
शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का तलाक राजेंद्रग्राम अदालत ने मंजूर कर लिया है। दोनों करीब पांच साल से अलग रह रहे थे।

अनूपपुर। मध्य प्रदेश के शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी के बीच वैवाहिक संबंध अब आधिकारिक रूप से समाप्त हो गए हैं। अनूपपुर जिले की राजेंद्रग्राम जिला अदालत ने दोनों की पारस्परिक सहमति के आधार पर विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी है। दोनों करीब पांच वर्षों से अलग रह रहे थे।
हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का विवाह 23 नवंबर 2017 को राजेंद्रग्राम में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। शादी के बाद दोनों कुछ समय तक साथ रहे, लेकिन बाद में उनके बीच मतभेद बढ़ने लगे। दोनों ने अदालत में आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने की इच्छा जताई और एक-दूसरे के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया।
बेटी के जन्म के बाद बढ़े मतभेद
विवाह के बाद दोनों राजेंद्रग्राम में साथ रहते थे। 20 जून 2019 को उनकी बेटी गिरिशा का जन्म हुआ। इसके बाद छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगे। धीरे-धीरे दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई और उन्होंने एक-दूसरे से मिलना-जुलना भी बंद कर दिया।
अदालत में दाखिल याचिका में हिमाद्री सिंह ने कहा कि अब दोनों के साथ रहने की कोई संभावना नहीं बची है और उनका दांपत्य जीवन समाप्त हो चुका है। दोनों ने अपनी इच्छा से आपसी सहमति के आधार पर विवाह विच्छेद की मांग की।
बेटी मां के साथ रहेगी
अदालत के समक्ष दोनों पक्षों ने बेटी की जिम्मेदारी को लेकर भी सहमति जताई। तय हुआ कि बेटी गिरिशा अपनी मां हिमाद्री सिंह के साथ रहेगी। उसके पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य में विवाह से जुड़े खर्चों की जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह स्वयं उठाएंगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने या अपनी बेटी के लिए नरेंद्र सिंह मरावी से किसी तरह का भरण-पोषण या गुजारा भत्ता नहीं मांगेंगी। शादी के दौरान मिले उपहारों और आभूषणों को लेकर भी दोनों के बीच कोई विवाद नहीं है।
छह महीने तक सुलह की कोशिश
अदालत ने दोनों को पुनर्विचार और सुलह के लिए छह महीने का समय दिया था। इस अवधि में न्यायालय की ओर से दोनों के बीच संबंध सुधारने और पुनर्मिलाप की कोशिश की गई, लेकिन यह सफल नहीं हो सकी।
छह महीने पूरे होने के बाद दोनों ने अदालत को बताया कि पति-पत्नी के रूप में साथ रहना संभव नहीं है और वे आपसी सहमति से विवाह विच्छेद चाहते हैं। इसके बाद अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत तलाक की डिक्री जारी कर दी।
नरेंद्र सिंह मरावी ने बताया कि तलाक का निर्णय आपसी सहमति से हुआ है। वहीं, उनकी ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता विनोद सिंह बनाकर ने भी अदालत के आदेश की पुष्टि की।


