चीन-रूस के साथ भारत को बताया दुनिया की ताकत, बेलारूस के राष्ट्रपति ने US को किया नजरअंदाज
एससीओ समिट में बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने भारत, चीन और रूस को दुनिया की तीन प्रमुख शक्तियों में शामिल किया। सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ डबल स्टैंडर्ड पर भी सख्त संदेश दिया गया।

बिश्केक। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भारत को लेकर बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको की टिप्पणी चर्चा में है। उन्होंने दुनिया के तीन शक्तिशाली देशों का जिक्र करते हुए भारत को चीन और रूस के साथ रखा। खास बात यह रही कि उनकी सूची में अमेरिका का नाम नहीं था। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित एससीओ सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सदस्य देशों के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।
भारत, चीन और रूस को बताया बड़ी ताकत
एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया में तीन ऐसे देश हैं जिन्हें आर्थिक और परमाणु क्षमता के लिहाज से प्रमुख शक्ति माना जा सकता है। उन्होंने चीन, रूस और भारत का नाम लेते हुए इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत और परमाणु शक्ति संपन्न देश बताया।
लुकाशेंको की इस टिप्पणी को भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक मंचों पर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक क्षमता को मजबूती से पेश करता रहा है।
एससीओ घोषणापत्र में आतंकवाद पर सख्त संदेश
एससीओ सम्मेलन में सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड अपनाने को अस्वीकार्य बताया। बिश्केक घोषणा-पत्र में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई गई। सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के पूरे नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की।
घोषणापत्र में इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल आतंकवादी, अलगाववादी और उग्रवादी गतिविधियों के लिए किए जाने पर भी चिंता जताई गई। सदस्य देशों ने सूचना सुरक्षा, डेटा संरक्षण और नए प्रकार के अपराधों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
पीएम मोदी ने आतंकवाद को लेकर उठाई आवाज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ मंच से आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि आतंकवाद को किसी देश की नीति या रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
पीएम मोदी ने आतंकवाद के वित्तपोषण, कट्टरपंथ, भर्ती और सुरक्षित पनाहगाहों समेत पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने की जरूरत बताई।
एससीओ में भारत के लिए क्यों अहम है यह सम्मेलन?
एससीओ भारत के लिए मध्य एशिया और व्यापक यूरेशिया क्षेत्र के साथ संबंध मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है। सम्मेलन में सुरक्षा, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और आतंकवाद से मुकाबले जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत ने एससीओ के तहत सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटने से जुड़े कई फैसलों का समर्थन किया। संगठन की अगली राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक 2027 में पाकिस्तान में आयोजित होने वाली है।


