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दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करने के आरोप में AAP नेता सौरभ भारद्वाज पर एफआईआर

दिल्ली में AAP नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की पहचान कथित रूप से उजागर करने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। पुलिस पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम के तहत मामले की जांच कर रही है।

दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करने के आरोप में AAP नेता सौरभ भारद्वाज पर एफआईआर
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नई दिल्ली। दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र में एक नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले को लेकर आवाज उठाने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सौरभ भारद्वाज अब कानूनी विवाद में घिर गए हैं। उन पर सोशल मीडिया के माध्यम से कथित रूप से पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप लगा है। इस मामले में जनकपुरी थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार मामला एक अधिवक्ता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सामने आया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सौरभ भारद्वाज ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी जानकारी साझा की, जिससे नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक हो सकती थी। कानून के तहत यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ित की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य होता है।

वकील की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

एफआईआर के अनुसार अधिवक्ता प्रवीण नारायण ने पुलिस को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया कि 11 मई 2026 को सौरभ भारद्वाज ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की थी। आरोप है कि पोस्ट में ऐसे विवरण और स्क्रीनशॉट शामिल थे, जिनसे पीड़ित बच्ची की पहचान सामने आने की आशंका थी।

शिकायतकर्ता ने दावा किया कि पोस्ट में मौजूद जानकारी न केवल संवेदनशील थी, बल्कि उससे पीड़िता और उसके परिवार की निजता भी प्रभावित हो सकती थी। उन्होंने इसे कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कार्रवाई की मांग की।

पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना कानूनन जरूरी

भारत में यौन अपराधों, विशेषकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है। इसका उद्देश्य पीड़ित और उसके परिवार की निजता की रक्षा करना तथा उन्हें सामाजिक और मानसिक आघात से बचाना है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी माध्यम—चाहे वह सोशल मीडिया हो, समाचार रिपोर्ट हो या अन्य सार्वजनिक मंच—पर ऐसी जानकारी साझा करना दंडनीय अपराध माना जाता है, जिससे पीड़ित की पहचान उजागर हो सके।

किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ केस?

पुलिस अधिकारियों ने शिकायत के साथ उपलब्ध कराए गए स्क्रीनशॉट और डिजिटल साक्ष्यों की प्रारंभिक जांच की। इसके बाद जनकपुरी थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

एफआईआर में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 23(4), किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 72 को शामिल किया गया है। पुलिस के अनुसार एफआईआर 24 मई को दर्ज की गई थी और मामले की जांच जारी है।

सोशल मीडिया रिकॉर्ड की होगी जांच

पुलिस अब संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, अकाउंट गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि साझा की गई जानकारी से वास्तव में पीड़िता की पहचान उजागर हुई या नहीं।

अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।


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