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सीजेआई पर टिप्पणी मामले में संजय राउत और निखिल वागले को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जानें पूरा मामला

CJI पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी किया है। SCBA की याचिका पर सुनवाई के दौरान दोनों को व्यक्तिगत पेशी से राहत मिली।

सीजेआई पर टिप्पणी मामले में संजय राउत और निखिल वागले को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जानें पूरा मामला
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नई दिल्ली। प्रधान न्यायाधीश (CJI) को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से दाखिल आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने दोनों से जवाब मांगा है। हालांकि, फिलहाल उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से छूट दी गई है।

मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी SCBA की याचिका का समर्थन किया। अब अगली सुनवाई में अदालत इस मामले पर आगे विचार करेगी।

SCBA की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि संजय राउत और निखिल वागले की टिप्पणियों से मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोनों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष जानना चाहा।

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि अदालत नोटिस जारी कर रही है और उम्मीद है कि सभी संबंधित लोग समझदारी से काम लेंगे। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई जल्द तय करने की बात भी कही।

निखिल वागले की सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद

याचिका के मुताबिक, पत्रकार निखिल वागले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सीजेआई को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। यह पोस्ट उस खबर के संदर्भ में बताई गई, जिसमें विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से सीजेआई के नहीं मिलने की बात कही गई थी।

SCBA ने आरोप लगाया कि पोस्ट से न्यायपालिका की गरिमा प्रभावित हुई। हालांकि, वागले ने विवाद के बाद कथित पोस्ट हटा दी और 15 अक्टूबर को अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र लिखकर सीजेआई तथा सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगने की जानकारी सामने आई है।

संजय राउत के बयान पर भी उठे सवाल

याचिका में संजय राउत के 12 अक्टूबर 2026 को दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि उन्होंने न्यायपालिका को लेकर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनमें न्यायाधीशों के सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने और मुख्यमंत्रियों की ओर से आयोजित रात्रिभोज में जाने जैसे दावे किए गए थे।

SCBA का कहना है कि ये आरोप तथ्यहीन हैं और न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकते हैं। ये याचिका में लगाए गए आरोप हैं; इन पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।

अटॉर्नी जनरल ने दी थी अवमानना कार्रवाई की मंजूरी

आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 15 अक्टूबर को सहमति दी थी। अपने पत्र में उन्होंने वागले की पोस्ट को अपमानजनक बताया और राउत के कथित दावों को तथ्यात्मक आधार से रहित माना। उन्होंने प्रथम दृष्टया दोनों मामलों को गंभीर बताते हुए न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख किया था।

व्यक्तिगत पेशी से मिली फिलहाल राहत

सुनवाई के दौरान SCBA अध्यक्ष प्रदीप राय ने दोनों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश देने की मांग की। हालांकि, अदालत ने इस चरण में उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है।

अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि सुप्रीम कोर्ट कथित आपराधिक अवमानना के आरोपों पर आगे क्या कदम उठाता है। फिलहाल, नोटिस जारी होने का अर्थ आरोपों का दोष सिद्ध होना नहीं है; दोनों पक्षों का जवाब और अदालत की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।


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