अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट की इमारत में आग का जिक्र कर घिरे संजय राउत, भाजपा बोली- क्या भारत में भी यही चाहते हैं?
संजय राउत ने अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट की इमारत में आग लगाए जाने की घटना का जिक्र कर भारत को सबक लेने की सलाह दी। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने उनके बयान की आलोचना की और इसे अराजकता को बढ़ावा देने वाला बताया।

नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट की इमारत में आग लगाए जाने की घटना का जिक्र करने के बाद विवादों में घिर गए हैं। राउत ने सोशल मीडिया पर इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के देशों, खासकर भारत को इससे सबक लेना चाहिए। उनके बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया कि राउत का बयान अराजकता को बढ़ावा देने वाला है।
संजय राउत ने पोस्ट में क्या कहा?
संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मराठी में एक पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट की इमारत में आग लगाए जाने की घटना का जिक्र किया। राउत के मुताबिक, वहां लोग इस बात से नाराज थे कि अदालत कथित तौर पर भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद कर रही थी।
उन्होंने पोस्ट में दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने संसद, सरकारी कार्यालयों और मंत्रियों के घरों को भी निशाना बनाया। राउत ने इन घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया के सभी देशों को इससे सबक लेना चाहिए, विशेष रूप से भारत को। हालांकि, उनके पोस्ट में घटना को लेकर किए गए दावों और उसके संदर्भ को स्वतंत्र रूप से परखना जरूरी है।
किरीट सोमैया ने साधा निशाना
राउत के बयान पर बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राउत अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट की इमारत जलाए जाने का समर्थन कर रहे हैं और देश में अराजकता चाहते हैं।
सोमैया ने अपनी पोस्ट में कहा कि राउत पहले राष्ट्रपति, फिर चुनाव आयोग और मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ बयान दे चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राउत भारत में भी सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ ऐसी घटना चाहते हैं। बीजेपी नेता ने कहा कि देश की जनता अराजकता को स्वीकार नहीं करेगी।
सोमैया ने यह भी दावा किया कि राउत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना से जुड़ी याचिका लंबित है। उन्होंने कहा कि संबंधित मामले में राउत को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा।
न्यायपालिका पर टिप्पणियों को लेकर पहले भी विवाद
संजय राउत इससे पहले भी न्यायपालिका पर अपनी टिप्पणियों को लेकर विवाद में आ चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का समय नहीं मिलने के बाद राउत ने न्यायपालिका को लेकर टिप्पणी की थी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की थी। बताया गया कि यह याचिका अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी की सहमति के बाद दायर की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक टिप्पणियां की गईं।
बयान से बढ़ी राजनीतिक बहस
अल्बानिया की घटना पर राउत की टिप्पणी ने भारत में न्यायपालिका की भूमिका और राजनीतिक नेताओं की सार्वजनिक भाषा को लेकर बहस तेज कर दी है। जहां बीजेपी ने उनके बयान की आलोचना की है, वहीं इस विवाद में राउत की टिप्पणी के वास्तविक संदर्भ और आशय को भी ध्यान में रखना जरूरी है।


