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158 वर्ष बाद अरुणाचल प्रदेश में फिर दिखा दुर्लभ हिमालयी पुष्प सियानैंथस हूकेरी

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में वैज्ञानिकों ने 158 वर्ष बाद दुर्लभ हिमालयी पुष्प सियानैंथस हूकेरी को पुनः खोजा है। विशेषज्ञों ने इसे भारत में संकटग्रस्त घोषित करने की सिफारिश की है।

158 वर्ष बाद अरुणाचल प्रदेश में फिर दिखा दुर्लभ हिमालयी पुष्प सियानैंथस हूकेरी
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ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण वनस्पति खोज करते हुए दुर्लभ हिमालयी पुष्प सियानैंथस हूकेरी को 158 वर्ष बाद भारत में पुनः दर्ज किया है। यह प्रजाति भारत में अंतिम बार वर्ष 1867 में सिक्किम में दर्ज की गई थी। इस खोज ने पूर्वी हिमालय की समृद्ध जैव विविधता को एक बार फिर वैश्विक स्तर पर रेखांकित किया है।

तवांग की ऊंची पहाड़ियों में मिली प्रजाति

भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) के वैज्ञानिकों ने सितंबर 2025 में तवांग जिले के मागो गांव के निकट चुना घाटी में लगभग 3600 मीटर की ऊंचाई पर इस पौधे को खोजा। अल्पाइन घास के मैदानों और पथरीली ढलानों पर इसके कुछ ही पौधे पाए गए। शोधकर्ताओं ने नमूनों को सुरक्षित कर केंद्रीय राष्ट्रीय हर्बेरियम, हावड़ा में जमा कराया है।

बैंगनी-नीले फूलों वाली दुर्लभ प्रजाति

घंटी के आकार के बैंगनी-नीले फूलों वाला यह छोटा शाकीय पौधा कठोर पर्वतीय परिस्थितियों के अनुकूल है। यह प्रायः अगस्त और सितंबर के बीच खिलता है तथा पूर्वी हिमालय के सीमित क्षेत्रों में ही पाया जाता है।

संरक्षण की बढ़ी आवश्यकता

वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत में इस प्रजाति के 50 से भी कम परिपक्व पौधे शेष हैं। इसी कारण शोधकर्ताओं ने इसे देश में आईयूसीएन मानकों के अनुसार ‘संकटग्रस्त’ श्रेणी में रखने की सिफारिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके आवास की सुरक्षा, विस्तृत सर्वेक्षण और बीज संरक्षण जैसे कदम आवश्यक होंगे।

पूर्वी हिमालय की जैव विविधता का प्रमाण

अरुणाचल प्रदेश सरकार ने इस खोज का स्वागत करते हुए इसे भारत की वनस्पति विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। यह पुनः खोज इस बात का संकेत है कि देश के दूरस्थ हिमालयी क्षेत्रों में अभी भी अनेक दुर्लभ प्रजातियां खोजे जाने की प्रतीक्षा में हैं।

यह उपलब्धि न केवल वैज्ञानिक समुदाय के लिए उत्साहजनक है, बल्कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।


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