राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने पहली बार मानी करीब 3 करोड़ रुपये की चोरी, सोना-चांदी चोरी की खबरें गलत
राम मंदिर दान चोरी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार करीब 3 करोड़ रुपये की चोरी स्वीकार की। कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने 14 करोड़ के सोना-चांदी चोरी की खबरों का खंडन किया और 22 जुलाई की ट्रस्ट बैठक में बड़े बदलावों के संकेत दिए।

अयोध्या। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी के मामले में पहली बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक तौर पर चोरी की रकम को लेकर बयान सामने आया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने स्वीकार किया कि मंदिर से करीब तीन करोड़ रुपये की चोरी हुई है। हालांकि उन्होंने उन खबरों का खंडन किया, जिनमें लगभग 14 करोड़ रुपये मूल्य के सोना, चांदी और अन्य कीमती सामान के गायब होने का दावा किया जा रहा था।
अब तक चोरी की रकम को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे थे। वहीं विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में लगभग 80 लाख रुपये की बरामदगी का उल्लेख किया गया था। ऐसे में ट्रस्ट की ओर से पहली बार सामने आया यह बयान मामले को नया आयाम देता है।
इस्तीफे की अटकलों को बताया पूरी तरह निराधार
पुणे दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में गोविंददेव गिरी ने अपने इस्तीफे की चर्चाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो कोई इस्तीफा दिया है और न ही ऐसा करने का कभी विचार किया है।
उन्होंने कहा कि वह छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों का पालन करते हैं और कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी छोड़कर पीछे हटने में विश्वास नहीं रखते। उनके अनुसार, वर्तमान समय में पूरी प्राथमिकता जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से पूरा कराने की है।
चंपत राय ने स्वेच्छा से छोड़ा पद
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने स्वयं अपनी इच्छा से पद छोड़ा है। उनके अनुसार, यह कहना सही नहीं होगा कि उन्हें किसी तरह का दबाव बनाया गया या उन्हें बलि का बकरा बनाया गया।
गोविंददेव गिरी ने कहा कि चंपत राय ने व्यवस्थागत लापरवाही की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए स्वेच्छा से इस्तीफा दिया और यह उनका व्यक्तिगत निर्णय था।
एसआईटी जांच पर जताया भरोसा
गोविंददेव गिरी ने कहा कि एसआईटी की जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और इसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिसने भी रामलला के दान के साथ अपराध किया है, उसे कानून के अनुसार सख्त सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। अपनी सादगी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी उनके पास निजी संपत्ति के नाम पर कोई आलीशान मकान नहीं है और वह बेहद सामान्य जीवन जीते हैं।
22 जुलाई की बैठक में हो सकते हैं बड़े फैसले
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली महत्वपूर्ण बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था और समितियों में कई बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
बैठक के एजेंडे में ट्रस्ट के रिक्त पदों पर नियुक्तियां, एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर चर्चा तथा ट्रस्ट की विभिन्न समितियों के पुनर्गठन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। हाल के इस्तीफों और कुछ पद रिक्त होने के कारण नई जिम्मेदारियां भी तय की जा सकती हैं।
पांच समितियों के पुनर्गठन पर रहेगी नजर
ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए निर्माण, वित्त, ऑडिट, धार्मिक और प्रबंधन (मैनेजिंग) समितियां गठित की गई हैं। इन समितियों का गठन ट्रस्ट डीड के अनुसार किया गया था।
निर्माण समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र कर रहे हैं। समिति में पहले चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और अयोध्या नरेश विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र सहित कई सदस्य शामिल थे। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के पद छोड़ने तथा अयोध्या नरेश के निधन के बाद कई स्थान रिक्त हो चुके हैं। ऐसे में आगामी बैठक में नए सदस्यों की नियुक्ति और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।


