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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि का बयान, कहा- चोरी के आरोप बेहद गंभीर, जांच से सामने आएगा पूरा सच

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने पहली बार बयान जारी किया। बोले- दान की गिनती से मेरा कोई संबंध नहीं, निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि का बयान, कहा- चोरी के आरोप बेहद गंभीर, जांच से सामने आएगा पूरा सच
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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर जारी विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दो पन्नों का विस्तृत बयान जारी कर स्पष्ट किया कि मंदिर के दान पात्रों से निकलने वाली नकदी की गणना या उसके प्रबंधन में उनकी कोई भूमिका नहीं रही है। उन्होंने पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

'राम भक्तों की आस्था को पहुंची ठेस'

गोविंद देव गिरि ने कहा कि चढ़ावे में कथित हेराफेरी की खबरों ने देश-विदेश में करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को आहत किया है। यदि वास्तव में लंबे समय से इस तरह की अनियमितता होती रही है तो यह अत्यंत दुखद और चिंताजनक विषय है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की सेवा उनके लिए किसी पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है और उन्होंने कभी भी ट्रस्ट में किसी जिम्मेदारी के लिए प्रयास नहीं किया।

ट्रस्ट से निजी खर्च नहीं लिया

अपने बयान में उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के गठन के बाद से वह नियमित रूप से अयोध्या आते रहे हैं, लेकिन आज तक उन्होंने अपने हवाई यात्रा, आवास या अन्य व्यक्तिगत खर्चों के लिए ट्रस्ट से एक भी रुपया नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत आस्था और सेवा का विषय है।

ऑडिट व्यवस्था का किया उल्लेख

कोषाध्यक्ष ने बताया कि ट्रस्ट की आय और व्यय का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है और नियमित रूप से उसका ऑडिट कराया जाता है। उन्होंने कहा कि पुणे स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट की टीम हर महीने अयोध्या जाकर खातों की जांच करती है और सभी वित्तीय दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। उनके अनुसार ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संचालित होती है।

कैश लेनदेन से दूरी का दावा

गोविंद देव गिरि ने कहा कि ट्रस्टी बनने के बाद उन्होंने किसी भी व्यक्ति से सीधे नकद दान स्वीकार नहीं किया। उन्होंने बताया कि केवल दो विशेष परिस्थितियों में नकद और चांदी का दान मिला था, जिसकी विधिवत रसीद जारी की गई थी। इसके अलावा ट्रस्ट में सभी दान बैंकिंग माध्यमों से स्वीकार किए गए हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास ट्रस्ट की किसी बैंक खाते पर हस्ताक्षर का अधिकार नहीं है और न ही उनके पास कोई चेक बुक है। ट्रस्ट के सभी भुगतान बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से किए जाते हैं।

दान की गणना स्थानीय व्यवस्था के तहत होती है

कोषाध्यक्ष ने कहा कि मंदिर के दान पात्रों से निकली नकदी की गणना स्थानीय स्तर पर नियुक्त टीम द्वारा की जाती है। इस प्रक्रिया के लिए स्थानीय ट्रस्टियों और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ओर से मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई थी। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया से उनका प्रत्यक्ष संबंध कभी नहीं रहा और उन्होंने संबंधित SOP भी हाल ही में पहली बार देखी।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

गोविंद देव गिरि ने कहा कि चोरी कितनी हुई, कब हुई और किस तरह हुई, इसका फैसला जांच एजेंसियां करेंगी। उन्होंने पुलिस, एसआईटी और न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि जो भी दोषी होगा, उसे कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

उन्होंने ट्रस्ट से भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय निगरानी को और मजबूत बनाने की अपील भी की। उनका कहना है कि विशेषज्ञों की मदद से ऐसा पारदर्शी और मजबूत सिस्टम तैयार किया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके।

उन्होंने विश्वास जताया कि निष्पक्ष जांच के बाद पूरा सच सामने आएगा और राम मंदिर की गरिमा तथा करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास पूरी तरह कायम रहेगा।


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