राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा! मोबाइल चैट से खुले कई राज, टिन्नू यादव पर मास्टरमाइंड होने का शक
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस को मोबाइल चैट से अहम सुराग मिले हैं। जेल में तीन आरोपियों से पांच घंटे पूछताछ हुई। टिन्नू यादव की भूमिका की जांच तेज, डिजिटल सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी।

अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में पुलिस को महत्वपूर्ण डिजिटल सुराग मिलने का दावा किया जा रहा है। रविवार को पुलिस टीम ने अदालत की अनुमति के बाद जिला जेल पहुंचकर तीन आरोपियों से करीब पांच घंटे तक पूछताछ की। जांच के दौरान मोबाइल चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को कई नए तथ्य हाथ लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों को संदेह है कि पूरे कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण के पीछे टिन्नू यादव की अहम भूमिका हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
डिजिटल चैट से मिले नए सुराग
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार पुलिस की साइबर सेल ने आरोपियों के मोबाइल फोन से पिछले एक वर्ष की चैट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड जुटाए हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने जेल में बंद आरोपियों से अलग-अलग और फिर आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की।
बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कई ऐसे बिंदुओं की पुष्टि करने की कोशिश की गई, जिनका उल्लेख पहले गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला ने अपने बयान में किया था। पुलिस ने सभी आरोपियों के लिखित बयान भी दर्ज किए हैं, जिन्हें आगे की जांच और न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
तीन आरोपियों से हुई लंबी पूछताछ
रविवार को पुलिस ने अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय से विस्तृत पूछताछ की। विवेचक और पुलिस उपाधीक्षक आशुतोष तिवारी सुबह करीब साढ़े 11 बजे जेल पहुंचे और शाम तक पूछताछ जारी रही।
सूत्रों का कहना है कि पुलिस को शेष आरोपियों—टिन्नू यादव, रमाशंकर मिश्र, मनीष यादव और सुभाष श्रीवास्तव—से भी पूछताछ की अनुमति मिल चुकी है। आने वाले दिनों में इन सभी से अलग-अलग पूछताछ की जाएगी। यदि जरूरत पड़ी तो पुलिस टिन्नू यादव की कस्टडी रिमांड भी मांग सकती है।
दो करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी की जांच
जांच एजेंसियां मोबाइल चैट में सामने आए वित्तीय लेनदेन और आपसी बातचीत का गहन विश्लेषण कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार चैट रिकॉर्ड में करीब दो करोड़ रुपये के कथित चढ़ावे की हेराफेरी से जुड़े संकेत मिले हैं।
बताया जा रहा है कि फरवरी महीने में कथित रकम के बंटवारे को लेकर कुछ आरोपियों के बीच विवाद भी हुआ था। पुलिस अब इन चैट्स की फोरेंसिक जांच करवा रही है ताकि डिजिटल साक्ष्यों की प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा सके।
कैसे बाहर निकलती थी नकदी, यही सबसे बड़ा सवाल
जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मंदिर परिसर से कथित तौर पर नकदी बाहर कैसे पहुंचती थी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इसमें किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी या सुरक्षा और प्रक्रिया में कहीं गंभीर चूक हुई।
सूत्रों के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा पर गणना प्रक्रिया के दौरान वाउचर तैयार करने की जिम्मेदारी थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या दस्तावेजी प्रक्रिया में किसी प्रकार की हेराफेरी की गई थी।
डिजिटल सबूतों पर टिकी आगे की कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई मोबाइल डेटा, चैट रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेजों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर की जाएगी। जांच एजेंसी मजबूत सबूत जुटाने के बाद ही आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।


