राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, याचिका में सीबीआई जांच की मांग
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। CBI जांच की मांग वाली याचिका पर 12 जुलाई के बाद सुनवाई होगी। पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी है।

CBI जांच और SIT गठित करने की मांग
यह याचिका अधिवक्ता अनूप अवस्थी की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के धन और मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में एफआईआर दर्ज कराने, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने तथा सीबीआई अधिकारी की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की निगरानी आवश्यक है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल आरोपों की सत्यता या गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और केवल तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार करने से इनकार किया है।
पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कई दस्तावेज जब्त
उधर, अयोध्या पुलिस ने मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से सात के ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में गठित छह टीमों ने सुबह से देर शाम तक अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों की संपत्तियों से जुड़े कई दस्तावेज, नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और सिक्के बरामद कर जब्त किए हैं। अब इन दस्तावेजों के आधार पर वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की जांच की जाएगी। पुलिस ने आरोपियों के परिजनों से भी कई घंटों तक पूछताछ कर महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई हैं।
ट्रस्ट पदाधिकारियों से भी पूछताछ
जांच का दायरा अब ट्रस्ट के पदाधिकारियों तक भी पहुंच गया है। ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय से पुलिस ने पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया है। हालांकि, दर्ज एफआईआर में उनका नाम आरोपी के रूप में शामिल नहीं है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आगामी दिनों में ट्रस्ट से जुड़े अन्य प्रमुख पदाधिकारियों, जिनमें डॉ. अनिल मिश्रा और अन्य जिम्मेदार सदस्य शामिल हैं, के भी बयान दर्ज किए जा सकते हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की क्रमवार जानकारी जुटाई जा सके।
हाईकोर्ट में भी सुनवाई की तैयारी
इसी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल तीन जनहित याचिकाओं पर भी सुनवाई प्रस्तावित है। याचिकाओं में सीबीआई जांच, उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग के गठन और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से चढ़ावे का विशेष ऑडिट कराने की मांग की गई है।
इन याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई के बाद मामले की जांच की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
संत समाज में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद संत समाज में भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद भी उन पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की अगली बैठक तक टाल दिए जाने पर कई संतों ने आपत्ति जताई है।
संत समाज का कहना है कि इतने गंभीर मामले में तत्काल निर्णय होना चाहिए था। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि यदि महासचिव ने इस्तीफा दिया तो वह ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को देने के बजाय कोषाध्यक्ष को क्यों सौंपा गया।
सीईओ नियुक्ति के प्रस्ताव पर भी मतभेद
राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग के बीच मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र द्वारा ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने के सुझाव पर भी संत समाज ने विरोध जताया है।
महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव कार्यक्रम में देशभर से पहुंचे संतों ने प्रस्ताव पारित कर कहा कि मंदिर के प्रबंधन में नौकरशाही का अत्यधिक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है और ट्रस्ट की परंपरागत व्यवस्था को बनाए रखा जाना चाहिए।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई का इंतजार है, जबकि पुलिस और एसआईटी स्तर पर जांच लगातार आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में न्यायालय और जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय कर सकती है।


