पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा की सपा में वापसी, भाजपा छोड़कर थामा अखिलेश यादव का हाथ
उत्तर प्रदेश में 2027 चुनाव से पहले छह बार मंत्री रहे राम आसरे कुशवाहा ने भाजपा छोड़कर करीब 13 साल बाद समाजवादी पार्टी में वापसी की। उन्होंने अखिलेश यादव को सीएम बनाने का संकल्प लिया।

‘जब तक अखिलेश CM नहीं बनेंगे, घर नहीं बैठेंगे’
सपा में वापसी के बाद राम आसरे कुशवाहा ने मुलायम सिंह यादव को याद किया। उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी ऐसा महसूस होता है कि ‘नेताजी’ उनके बीच मौजूद हैं। कुशवाहा ने कहा कि अखिलेश यादव को भी वही सम्मान और पदवी मिलनी चाहिए।
उन्होंने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि जब तक अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे, तब तक घर नहीं बैठेंगे। कुशवाहा ने अपने संबोधन में सम्मान को राजनीति के साथ-साथ रिश्तेदारी और व्यवसाय में भी महत्वपूर्ण बताया। उनकी इस वापसी को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा के राजनीतिक अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है।
कभी सपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं कुशवाहा
राम आसरे कुशवाहा का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। वह बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी में रहने के बाद बीजेपी में शामिल हुए थे। वह उत्तर प्रदेश सरकार में छह बार मंत्री रह चुके हैं और सरसौल विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रहे हैं।
कुशवाहा इससे पहले सपा में महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 2013 में तत्कालीन सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया था। अब लंबे अंतराल के बाद उनकी सपा में वापसी हुई है।
अखिलेश ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना
इसी बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा की सरकार बनने पर भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने विश्वकर्मा समाज के उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने की बात कही।
अखिलेश ने राज्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बुंदेलखंड और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण पर सवाल उठाते हुए अपने कार्यकाल में बने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उल्लेख किया। इन दावों पर सरकार और संबंधित एजेंसियों का पक्ष अलग हो सकता है।
रोजगार और यूपीआई शुल्क का मुद्दा भी उठा
सपा अध्यक्ष ने रोजगार को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने जुलाई और अगस्त में रोजगार के मोर्चे पर उपलब्धियों को लेकर सवाल उठाए और कहा कि सपा की सरकार बनने पर युवाओं को रोजगार और नौकरियों के अवसर देने पर जोर दिया जाएगा।
अखिलेश ने UPI पर शुल्क के मुद्दे को लेकर भी सरकार की आलोचना की और इसे वापस लेने की मांग की। इस तरह राम आसरे कुशवाहा की सपा में वापसी के साथ ही पार्टी ने संगठन और सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक मुद्दों को भी सामने रखा है।


