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राजा रघुवंशी मर्डर केस: सोनम को फिलहाल राहत, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रोक लगाने से किया इनकार

राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया। जानिए अदालत की टिप्पणी, मेघालय सरकार की दलील और पूरे मामले का अपडेट।

राजा रघुवंशी मर्डर केस: सोनम को फिलहाल राहत, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रोक लगाने से किया इनकार
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नई दिल्ली। राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को लेकर उसके मन में कुछ प्रारंभिक सवाल हैं। चूंकि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं, इसलिए इस चरण में जमानत पर रोक लगाना उचित नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए सोनम रघुवंशी से जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत सुनवाई के दौरान सभी कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

मेघालय सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को बताया 'चौंकाने वाला'

सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने अदालत को बताया कि यह एक सुनियोजित हत्या का मामला है, जिसमें राजा रघुवंशी की हत्या कर उनका शव गहरी खाई में फेंक दिया गया था।

सरकार का कहना है कि सोनम रघुवंशी घटना के बाद फरार हो गई थीं और बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले में 94 गवाह हैं और ट्रायल की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में जमानत से जांच और मुकदमे पर असर पड़ सकता है।

क्या टाइपिंग की गलती बनी जमानत का आधार?

सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी दस्तावेज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403(1) लिखे जाने को आधार बनाकर जमानत दे दी।

उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता में धारा 403 अस्तित्व में ही नहीं है और यह केवल टाइपिंग की त्रुटि थी। गिरफ्तारी के समय मजिस्ट्रेट ने आरोपी को हत्या के आरोप और गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट रूप से बताए थे। ऐसे में केवल तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत देना उचित नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछे अहम सवाल, बचाव पक्ष ने रखा अपना पक्ष

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश ने पूछा कि यदि पहले की जमानत याचिकाओं में गिरफ्तारी प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, तो बाद में यही मुद्दा जमानत का आधार कैसे बन गया।

वहीं, सोनम रघुवंशी की ओर से पेश वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार उन्हें विधिवत नहीं बताए गए थे। उन्होंने अदालत को बताया कि सोनम पर कड़ी शर्तें लागू हैं और उन्हें शिलांग में ही रहना होगा, इसलिए उनके फरार होने की आशंका नहीं है। बचाव पक्ष का कहना था कि ट्रायल शुरू हो चुका है, इसलिए लगातार हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है।

क्या है पूरा हनीमून मर्डर केस?

राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी 12 मई 2025 को हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों हनीमून मनाने मेघालय गए थे। 23 मई के बाद दोनों लापता हो गए। बाद में उनकी किराये की स्कूटी बरामद हुई और 2 जून को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई से मिला।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोप लगाया कि हत्या पहले से रची गई साजिश का हिस्सा थी, जिसमें सोनम रघुवंशी, उनके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य आरोपी शामिल थे। मेघालय पुलिस इस मामले में 700 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और ट्रायल फिलहाल जारी है।


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