Top
Begin typing your search above and press return to search.

राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल उल्लंघन मामले में केंद्र सख्त, गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से मांगी रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल के उल्लंघन और वेन्यू बदलने के मामले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है। गृह मंत्री ने इसे घटना को संवैधानिक गरिमा पर आघात बताया है। गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर टीएमसी सरकार के इस व्यवहार को 'अराजक' करार देते हुए इसे राष्ट्रपति पद का अपमान बताया है।

राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल उल्लंघन मामले में केंद्र सख्त, गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से मांगी रिपोर्ट
X

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi मुर्मू) के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन और कार्यक्रम स्थल में अचानक बदलाव को लेकर विवाद गहरा गया है। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय (Ministry of Home अफेयर्स) ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शाम पांच बजे तक स्पष्टीकरण देने को कहा है।

यह विवाद दार्जिलिंग जिले में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन से जुड़ा है, जहां राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। मूल कार्यक्रम बिधाननगर में प्रस्तावित था, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़भाड़ का हवाला देकर इसे गोशाईपुर स्थानांतरित कर दिया। राष्ट्रपति ने स्थल छोटा होने पर नाराजगी जताई और ममता (Mamata Banerjee ) से प्रोटोकॉल पालन पर सवाल उठाए। राष्ट्रपति ने ममता बनर्जी को छोटी बहन बताते हुए पूछा कि क्या वो उनसे नाराज हैं, क्योंकि न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचीं, जबकि पद की गरिमा के लिए प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है।

इन प्रोटोकॉल्स का हुआ उल्लंघन

सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल में कई पैमानों पर सुरक्षा संबंधित ब्लू बुक के नियमों का उल्लंघन हुआ है। जिसमें- प्रेसिडेंट को रिसीव करने और सी-ऑफ करने के लिए मुख्यमत्री, प्रमुख सचिव और पुलिस महानिदेशक क्यों नहीं थे?। सिर्फ सिलीगुड़ी के मेयर ही उन्हें रिसीव करने के लिए वहां थे। राष्ट्रपति के लिए बने वॉशरूम में भी पानी नहीं था। प्रशासन जिस रास्ते से गुज़रा, वह कचरे से भरा हुआ था। सूत्रों का ये भी कहना है कि इस परिस्थितियों के लिए दार्जिलिंग के डीएम, सिलीगुड़ी के सीपी और एडीएम जिम्मेदार हैं।

अमित शाह ने ममता को घेरा

इस मामले में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक्स पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने अराजक व्यवहार करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान कर एक नया निचला स्तर छू लिया है। उन्होंने इसे भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात बताया और कहा कि आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक आहत और दुखी महसूस कर रहा है। कार्यक्रम में प्रोटोकॉल की खुली अनदेखी कर राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है।

शाह ने आरोप लगाया कि ये घटना टीएमसी सरकार में व्याप्त अव्यवस्था और गिरावट को दिखाती है। सरकार न सिर्फ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, बल्कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद का भी सम्मान नहीं करती। खास तौर पर आदिवासी भाई-बहनों के कार्यक्रम में हुआ ये व्यवहार पूरे देश के लिए अपमानजनक है। केंद्रीय गृह ने इस घटना को भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात करार दिया है। आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक आहत और दुखी महसूस कर रहा है।

ममता ने आरोपों को किया खारिज

दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन अगर कोई 50 बार भी आए तो हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इस वक्त धरने पर बैठी हैं और जिस कार्यक्रम का जिक्र किया जा रहा है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।

उन्होंने इस कार्यक्रम के राज्य को जानकारी न होने की बात करते हुए कहा, 'उस कार्यक्रम के आयोजकों, फंडिंग या आयोजन को लेकर राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। जब भी राष्ट्रपति राज्य में आती हैं या जाती हैं तो इसकी सूचना मिलती है, लेकिन संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न ही राज्य सरकार उस कार्यक्रम का हिस्सा थी।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it