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पीओके में बढ़ा विरोध: बच्चों और महिलाओं ने संभाली आंदोलन की कमान, पाकिस्तानी सेना के खिलाफ गूंजे आजादी के नारे

पीओके में सैन्य दमन और आर्थिक संकट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। स्कूली बच्चे, महिलाएं और हजारों नागरिक सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।

पीओके में बढ़ा विरोध: बच्चों और महिलाओं ने संभाली आंदोलन की कमान, पाकिस्तानी सेना के खिलाफ गूंजे आजादी के नारे
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मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चल रहा जनआंदोलन अब और व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है। सैन्य दमन, आर्थिक बदहाली और कथित राजनीतिक उत्पीड़न के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों में अब स्कूली बच्चे और महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हो रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं तथा अपने अधिकारों और स्वतंत्रता की मांग उठा रहे हैं।

बच्चों और महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

पीओके के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। सुधनोती जिले के तरार खेल क्षेत्र में 10 से 12 वर्ष की आयु के स्कूली बच्चों ने सार्वजनिक स्थानों पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया। बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर अपने अधिकारों के समर्थन में नारे लगाए और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।

वहीं मंधोल क्षेत्र में सैकड़ों महिलाओं ने मार्च निकालकर अपनी मांगों को बुलंद किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं, रोजगार और राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। महिलाओं ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की नीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाई।

रावलकोट में जारी है विशाल धरना

रावलकोट के ईदगाह मैदान में पिछले 11 दिनों से बड़े स्तर पर धरना जारी है। स्थानीय संगठनों के अनुसार, इस धरने में हजारों लोग शामिल हैं और आंदोलन लगातार विस्तार पा रहा है। प्रदर्शनकारी महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी और कथित राजनीतिक दमन जैसे मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और छात्र मौजूद हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

अवामी एक्शन कमेटी ने दिया अल्टीमेटम

आंदोलन का नेतृत्व कर रही अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान सरकार को 38 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए 23 जून तक कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया है। संगठन के नेताओं का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

रावलकोट में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संगठन के प्रमुख नेताओं ने प्रशासन पर जनता की आवाज दबाने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठी आवाज

पीओके के मुद्दे को लेकर विदेशों में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। लंदन में ब्रिटिश संसद के बाहर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन कर क्षेत्र में मानवाधिकारों और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्थिति पर ध्यान देने और निष्पक्ष जांच की मांग की।

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि क्षेत्र के नागरिक लंबे समय से बेहतर प्रशासन, सस्ती बिजली, आर्थिक राहत और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इन मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।

पीओके में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों ने क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं।


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