पीएम मोदी की राष्ट्रपति से मुलाकात के चर्चाएं तेज, जल्द हो सकता है केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं। जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और भाजपा के संगठनात्मक बदलावों के बीच नए मंत्रियों की एंट्री की चर्चा।

राष्ट्रपति भवन में हुई अहम मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। यह बैठक पद्म पुरस्कार समारोह के तुरंत बाद हुई। राष्ट्रपति भवन ने सोशल मीडिया पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं, लेकिन बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह मुलाकात सामान्य शिष्टाचार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। खासकर तब, जब केंद्र सरकार में फेरबदल और विस्तार की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं।
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे ने बढ़ाई अटकलें
कैबिनेट विस्तार की चर्चा को सबसे ज्यादा बल भाजपा नेता जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे से मिला है। केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक मामलों तथा मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद पार्टी ने उन्हें दोबारा उच्च सदन नहीं भेजा।
राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद मंत्रिपरिषद में रिक्त स्थान बनने से नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है।
रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर भी चर्चा
रेल मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल भी हाल ही में समाप्त हुआ है। भाजपा ने उन्हें भी दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया है।
ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि सरकार कुछ नए चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल कर सकती है। इसके अलावा कई मंत्रालयों के प्रभार में बदलाव की भी संभावना जताई जा रही है।
संगठन और सरकार में एक साथ बदलाव की तैयारी?
भाजपा ने पिछले कुछ महीनों में कई केंद्रीय नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा की कमान दी गई, जबकि केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा में महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई थी।
इन नियुक्तियों के बाद से यह माना जा रहा है कि पार्टी आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर संतुलन बनाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में कुछ नेताओं को संगठन में और कुछ को सरकार में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
नए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों पर रहेगा फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो भाजपा क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दे सकती है। दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और कुछ चुनावी राज्यों से नए चेहरों को प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है।
हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व के स्तर पर ही होगा, लेकिन हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि केंद्र सरकार में जल्द कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात, मंत्रियों के इस्तीफे और संगठनात्मक फेरबदल ने राजनीतिक हलकों में संभावित कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।


