पीएम मोदी के साथ एनडीए सांसदों ने लहराया तिरंगा, संसद परिसर में झारखंड मुद्दे पर शक्ति प्रदर्शन
PM मोदी की मौजूदगी में NDA सांसदों की ‘मंगल मिलन’ बैठक हुई। इसके बाद संसद परिसर में झारखंड छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर सत्ता पक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया।

बैठक के बाद एनडीए सांसदों ने संसद परिसर में झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन और कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। सांसदों के हाथों में पोस्टर थे, जिनमें झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया। सत्ता पक्ष की ओर से कांग्रेस पर भी छात्रों के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया गया।
छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की तैयारी
एनडीए सांसदों की रणनीति के तहत संसद में प्रवेश के दौरान ऐसे पोस्टर प्रदर्शित किए जाने की तैयारी है, जिनमें सरकार की ओर से छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा की इच्छा जताने का दावा किया गया है। साथ ही झारखंड सरकार पर छात्रों के साथ कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष संसद की कार्यवाही बाधित कर रहा है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रहा है। वहीं, सरकार की ओर से अपने सांसदों को सदन में सक्रिय भूमिका निभाने और जरूरी विधेयकों की कार्यवाही में भाग लेने पर जोर दिया जा रहा है।
‘मंगल मिलन’ में सरकार की उपलब्धियों पर भी चर्चा
इससे पहले हुई ‘मंगल मिलन’ बैठक में भाजपा सांसदों ने सरकार की उपलब्धियों को लेकर चर्चा की थी। रोजगार, आर्थिक विकास, खेल और गरीबी उन्मूलन जैसे विषय बैठक में प्रमुख रहे। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि केंद्र की नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के क्षेत्र में सुधार हुआ है।
भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर संसद में हंगामा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सभी एनडीए सांसदों को सदन में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और मतदान की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी हो सके।
क्या है ‘मंगल मिलन’ बैठक?
‘मंगल मिलन’ NDA संसदीय दल की नियमित रणनीतिक बैठक का नया स्वरूप है। इसका उद्देश्य गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय कायम करना और संसद की कार्यवाही को लेकर साझा रणनीति तैयार करना है।
बैठक में भाजपा के अलावा शिवसेना, एलजेपी, टीडीपी, जेडीयू और अन्य सहयोगी दलों के सांसद भी शामिल होते हैं। संसद सत्र के दौरान यह बैठक सत्ता पक्ष के लिए रणनीति तय करने और सहयोगी दलों के नेताओं के बीच जिम्मेदारियां बांटने का महत्वपूर्ण मंच बन गई है।


