पीएम मोदी से मुलाकात के बाद मलेशिया ने दिखाई ब्रह्मोस मिसाइल में रुचि, चीन की बढ़ सकती है चिंता
भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस एयर-टू-सर्फेस मिसाइल प्रणाली खरीदने में मलेशिया की दिलचस्पी उसकी रक्षा जरूरतों के लिए अमेरिका और अमेरिका समर्थक देशों पर निर्भरता कम कर सकती है।

नई दिल्ली। भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस एयर-टू-सर्फेस मिसाइल प्रणाली खरीदने में मलेशिया की दिलचस्पी उसकी रक्षा जरूरतों के लिए अमेरिका और अमेरिका समर्थक देशों पर निर्भरता कम कर सकती है।
दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, रणनीतिक परामर्श कंपनी एशिया ग्रुप एडवाइजर्स में मलेशिया के एसोसिएट डायरेक्टर कमलेश कुमार ने कहा कि भारत के साथ करीबी सहयोग मलेशिया को बिन किसी एक खेमे में स्पष्ट रूप से शामिल हुए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सुरक्षा साझेदार प्रदान करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत मलेशिया के रक्षा साझेदारों की सूची में एक महत्वपूर्ण नया सहयोगी बन सकता है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली में रुचि जताई थी।
कमलेश कुमार के अनुसार, रक्षा साझेदारियों में विविधता लाने का उद्देश्य रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना भी है। उन्होंने आगाह किया कि यह कदम चीन की चिंता बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता और बहुउद्देश्यीय उपयोगिता को देखते हुए दक्षिण चीन सागर में मलेशिया की प्रतिरोधक क्षमता (डिटरेंस) को लेकर धारणा प्रभावित हो सकती है। दक्षिण चीन सागर वह क्षेत्र है, जहां चीन और मलेशिया दोनों अपने-अपने दावे करते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मलेशिया इस प्रणाली का अधिग्रहण करता है तो उसे स्पष्ट रूप से बताना होगा कि इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है, न कि किसी विशेष देश को निशाना बनाना।
रिपोर्ट के मुताबिक, मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम 12-13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आए थे, जहां मलेशिया ने एक साझेदार देश के रूप में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने भारत का दौरा जारी रखते हुए दोनों देशों के बीच निवेश और पूंजी प्रवाह बढ़ाने की वकालत की।
सनवे यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर याह किम लेंग ने कहा कि भारत और मलेशिया के बीच आर्थिक संबंध अभी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में मलेशिया और भारत के बीच व्यापार 79.3 अरब रिंगिट का रहा, जो अमेरिका और चीन के साथ उसके 900 अरब रिंगिट से अधिक के व्यापार की तुलना में काफी कम है। यह स्थिति तब है, जब दोनों देशों ने 2024 में एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
कुआलालंपुर स्थित रणनीतिक सलाहकार फर्म डेंसुई के साझेदार एरिक लो ने कहा कि भारत के साथ संबंध मजबूत करने का मतलब चीन या अमेरिका से दूरी बनाना नहीं है, बल्कि मलेशिया के आर्थिक और रणनीतिक विकल्पों का विस्तार करना है। उनके अनुसार, यह कदम दीर्घकालिक दृष्टि से मलेशिया की स्थिति को और मजबूत कर सकता है।


