पीएम मोदी बोले- 21वीं सदी में टेक्नोलॉजी, डेटा और नॉलेज ही पावर, सबको अवसर देना जरूरी
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में PM मोदी ने टेक्नोलॉजी, डेटा और नॉलेज को 21वीं सदी की ताकत बताया। जानिए डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप पर उनके विचार।

‘पावर टू कंट्रोल’ नहीं, ‘पावर टू इम्पावर’ का समय
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हर दौर में शक्ति के स्रोत और उसकी परिभाषा बदलती रही है। 21वीं सदी में टेक्नोलॉजी, डेटा और नॉलेज महत्वपूर्ण शक्ति बनकर उभरे हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि इनका लाभ समाज के कितने लोगों तक पहुंच रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तकनीक केवल कुछ लोगों को आगे बढ़ाएगी या करोड़ों लोगों की क्षमता बढ़ाएगी? क्या ज्ञान कुछ लोगों तक सीमित रहेगा या सभी को आगे बढ़ने का अवसर देगा?
मोदी ने कहा कि भारत की परंपरा लोगों को सशक्त बनाने की सीख देती है। इसी सोच को सरकार ने अपनी कार्यसंस्कृति और शासन व्यवस्था में लागू करने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक, अब शक्ति का इस्तेमाल दूसरों को नियंत्रित करने के बजाय उन्हें सक्षम बनाने के लिए होना चाहिए।
डिजिटल भारत में आम नागरिक की भागीदारी
प्रधानमंत्री ने भारत को ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ बताते हुए देश की भाषाई और मीडिया विविधता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में 100 से अधिक भाषाएं, हजारों पंजीकृत समाचार पत्र और प्रकाशन तथा एक हजार से ज्यादा सैटेलाइट टीवी चैनल हैं। सोशल मीडिया के विस्तार ने भी लोगों को अपनी बात रखने और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने का मंच दिया है।
मोदी ने विदेशी मेहमानों से भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को समझने और इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में एक स्ट्रीट वेंडर और बड़े कार शोरूम का कारोबार भले ही अलग-अलग स्तर का हो, लेकिन दोनों डिजिटल भुगतान के एक ही प्लेटफॉर्म का लाभ उठा सकते हैं। यह समावेशी तकनीक की ताकत को दिखाता है।
देश में 2.5 लाख से ज्यादा स्टार्टअप
प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इकोसिस्टम में आए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत में स्टार्टअप की संख्या बढ़कर 2.5 लाख से अधिक हो गई है और इनमें लगभग आधे छोटे शहरों तथा कस्बों से आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 45 प्रतिशत स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है।
तकनीक से पारदर्शी शासन
मोदी ने कहा कि तकनीक के जरिए सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाई जा रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और नागरिकों की सुविधा बढ़ाने में मदद मिली है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, डिजिटल व्यवस्था सरकार और आम नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने का माध्यम बनी है।


