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संसद में तीसरे दिन भी हंगामा, लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित; काले कपड़ों में विपक्ष का प्रदर्शन

संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही हंगामे के बीच दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। कांग्रेस सहित विपक्ष ने काले कपड़े पहनकर NEET, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों को लेकर संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

संसद में तीसरे दिन भी हंगामा, लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित; काले कपड़ों में विपक्ष का प्रदर्शन
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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का तीसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आया। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोनों सदनों को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे और विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्ष ने NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और अन्य मामलों पर तत्काल चर्चा तथा जवाबदेही की मांग उठाई।

पिछले दो दिनों से लगातार जारी गतिरोध के बीच बुधवार को भी संसद परिसर में राजनीतिक माहौल गर्म रहा। विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

लोकसभा में प्रश्नकाल से पहले ही हंगामा

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने अपने नोटिस वाले मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में बढ़ते शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष से प्रश्नकाल चलने देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए सदन तैयार है, लेकिन प्रश्नकाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसे बाधित नहीं किया जाना चाहिए। अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद विपक्ष द्वारा उठाए गए विषयों पर चर्चा कराई जा सकती है। इसके बावजूद विपक्षी सांसद शांत नहीं हुए और लगातार नारेबाजी करते रहे। अंततः सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

राज्यसभा में भी नहीं चल सकी कार्यवाही

राज्यसभा की शुरुआत दिवंगत सदस्यों और अन्य व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद विभिन्न मंत्रालयों के दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने थे, लेकिन विपक्ष ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार विरोध शुरू कर दिया।

विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया तथा इस पर तत्काल चर्चा की मांग की। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्षी सदस्यों से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने और उचित समय पर अपनी बात रखने का आग्रह किया। लगातार हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही भी दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।

काले कपड़ों में संसद पहुंचे विपक्षी सांसद

बुधवार को कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे। विपक्ष का कहना है कि यह विरोध छात्रों के हितों, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और हालिया घटनाओं के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन है।

विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में मार्च निकालते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग दोहराई। उनका आरोप है कि NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और छात्रों की समस्याओं पर सरकार संतोषजनक जवाब देने में विफल रही है। साथ ही विपक्ष ने हाल में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

सदन में रखे जाने थे कई अहम दस्तावेज

आज के कार्यसूची के अनुसार कई केंद्रीय मंत्रियों को अपने-अपने मंत्रालयों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज सदन के पटल पर रखने थे।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बी. संजय कुमार को गृह मंत्रालय से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने थे। वहीं बीएल वर्मा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, सुकांत मजूमदार शिक्षा मंत्रालय तथा हर्ष मल्होत्रा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से दस्तावेज पेश करने वाले थे।

इसके अलावा भाजपा सांसद के. लक्ष्मण और कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह को लोक लेखा समिति (PAC) की वर्ष 2026-27 की चार रिपोर्टें सदन में प्रस्तुत करनी थीं। इनमें स्वदेशी 155 एमएम/45 कैलिबर 'धनुष' तोप प्रणाली के उत्पादन में हुई देरी से संबंधित महत्वपूर्ण रिपोर्ट भी शामिल है।

गतिरोध खत्म होने के इंतजार में संसद

संसद के मानसून सत्र के शुरुआती तीन दिनों में विपक्ष और सरकार के बीच सहमति नहीं बन सकी है। विपक्ष लगातार छात्रों से जुड़े मुद्दों, परीक्षा प्रणाली और अन्य मामलों पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह नियमों के तहत किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि दोपहर बाद दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति बनती है या नहीं, ताकि संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके और लंबित विधायी तथा अन्य महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जा सकें।


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