सिंधु के पानी के लिए तड़प रहा पाकिस्तान! संयुक्त राष्ट्र में गिड़गिड़ाया, भारत से संधि बहाल करने की मांग
सिंधु जल संधि पर भारत के सख्त रुख से घबराए पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दरवाजा खटखटाया है। पाकिस्तान ने UNSC से भारत पर दबाव बनाकर संधि पूरी तरह बहाल कराने की अपील की है और इसे क्षेत्रीय शांति व मानवीय स्थिति से जोड़ने की कोशिश की है।

नई दिल्ली। सिंधु जल संधि (IWT) पर भारत के सख्त रुख से घबराया पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों की शरण में पहुंच गया है। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष भारत के फैसले का मुद्दा उठाते हुए संधि को 'पूरी तरह लागू' कराने की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X' पर जानकारी दी कि उन्होंने पाकिस्तान के उप‑प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री की ओर से लिखा गया पत्र यूएन जनरल असेंबली के अध्यक्ष को सौंपा है। इस पत्र में भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने को 'क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा' बताया गया है।
संयुक्त राष्ट्र से भारत पर दबाव बनाने को गिड़गिड़ा रहा पाक
भारत के फैसले से तिलमिलाए पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वह भारत से सिंधु जल संधि को पूरी तरह बहाल करने का आह्वान करे. पत्र में कहा गया है कि भारत का फैसला पाकिस्तान में मानवीय संकट पैदा कर सकता है। साथ ही, भारत पर 'प्रचार अभियान' चलाने का आरोप लगाते हुए कश्मीर मुद्दे को भी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया गया है।
Earlier today, I handed over a letter from the Deputy Prime Minister/Foreign Minister of Pakistan to the President of the United Nations General Assembly.
— Asim Iftikhar Ahmad, PR of Pakistan to the UN (@PakistanPR_UN) April 24, 2026
The letter highlights the grave implications of India’s illegal suspension of the Indus Waters Treaty (IWT) for regional… pic.twitter.com/b4kqdiRIpA
भारत ने पानी को बनाया रणनीतिक हथियार
इस बीच अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने पहली बार पानी को एक रणनीतिक और शर्तों से जुड़ा मुद्दा बनाया है। यूरोपावायर के लिए लिखते हुए ग्रीक विश्लेषक दिमित्रा स्टाइकौ ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने यह साफ कर दिया कि खून और पानी साथ‑साथ नहीं बह सकते।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1960 की सिंधु जल संधि तीन युद्धों, कारगिल संघर्ष, संसद हमला, 26/11, उरी और पुलवामा जैसे बड़े आतंकी हमलों के बावजूद बनी रही, लेकिन पिछले 65 साल में पहली बार भारत ने इसे अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। इससे पाकिस्तान पर यह स्पष्ट संदेश गया है कि सीमा‑पार आतंकवाद की कीमत अब उसकी राष्ट्रीय जल जीवनरेखा से जुड़ सकती है।
पाकिस्तान की धमकियों पर भारत का करारा जवाब
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर परमाणु धमकियों और बांधों पर हमले की बातें की जा रही हैं। लेकिन भारत का रुख साफ है कि अब नीतियां धमकियों से नहीं बदली जाएंगी। कानूनी रूप से भी भारत के कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप माना जा रहा है, खासकर बदली हुई परिस्थितियों और लगातार हो रहे आतंकी हमलों के संदर्भ में।
कुल मिलाकर, सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले ने पाकिस्तान को कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों मोर्चों पर बैकफुट पर ला दिया है। UNSC में गुहार लगाकर पाकिस्तान यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह पीड़ित है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का संदेश कहीं ज्यादा स्पष्ट है कि आतंक और समझौते साथ नहीं चल सकते।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने सस्पेंड की सिंधु जल संधि
भारत ने 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty- IWT) के क्रियान्वयन को अस्थायी रूप से सस्पेंड करने का फैसला किया था। यह कदम पहलगाम आतंकी हमले के ठीक बाद उठाया गया, जिसमें 26 सामान्य नागरिकों की जान गई थी। यह आतंकी हमला पाकिस्तान से आए आतंकियों ने किया था।
क्यों सस्पेंड की गई संधि?
भारत का स्पष्ट तर्क था कि खून और पानी एक साथ नहीं बर सकते। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक 1960 की संधि को उसी पुराने ढर्रे पर चलाना भारत के राष्ट्रीय हित और नागरिकों की सुरक्षा के खिलाफ है।


