‘मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व’, पी चिदंबरम ने पीएम मोदी के बयान पर किया पलटवार
पीएम मोदी की स्वतंत्रता दिवस पर ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने पलटवार किया। चिदंबरम ने कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी।
पीएम मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए समाज को गलत दिशा में ले जाने वाले कथित तत्वों को लेकर चेतावनी दी थी। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा था कि ऐसे लोगों को पहचानना जरूरी है।
चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर दिया जवाब
पी चिदंबरम ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से प्रधानमंत्री पर हमले और तेज हो गए हैं।
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता जयराम रमेश और पवन खेड़ा सहित कई नेताओं ने पीएम मोदी की टिप्पणी पर सवाल उठाए थे। वाम दलों के नेताओं ने भी इस बयान को लेकर प्रधानमंत्री की आलोचना की।
I am proud to be a dimagi naxal !
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) August 16, 2026
जयराम रमेश ने ‘अर्बन नक्सल’ का मुद्दा उठाया
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ वर्ष पहले तक ‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था। उन्होंने दावा किया कि संसद में जब इस शब्द की परिभाषा को लेकर सवाल पूछा गया तो सरकार की ओर से कहा गया था कि ‘अर्बन नक्सल’ नाम की कोई आधिकारिक श्रेणी या परिभाषा नहीं है।
रमेश ने जाति जनगणना का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पहले जाति जनगणना की मांग को लेकर सरकार के आलोचकों को ‘अर्बन नक्सल’ विचारधारा से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन बाद में सरकार ने जाति जनगणना कराने का फैसला लिया। उन्होंने इसे सरकार के पुराने राजनीतिक रुख में बदलाव के तौर पर पेश किया।
वाम दलों और टीएमसी ने भी जताई आपत्ति
सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने पीएम मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को गंभीर बताया। वहीं सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर भी असहमति रखने वालों को निशाना बनाना उचित नहीं है।
टीएमसी नेता साकेत गोखले ने भी प्रधानमंत्री पर स्वतंत्रता दिवस के मंच का इस्तेमाल आलोचकों को निशाना बनाने के लिए करने का आरोप लगाया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व का मंच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय देश की एकता और भविष्य की प्राथमिकताओं पर केंद्रित होना चाहिए।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि देश के विकास और सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाने वाली मानसिकता के खिलाफ सतर्क रहना जरूरी है। इस बयान के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है।


