संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन, पूछा- 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' छात्र आंदोलन पर जवाब की मांग तेज
संसद परिसर में विपक्ष ने 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। INDIA गठबंधन के सांसदों ने प्रदर्शन किया, वहीं पेपर लीक रोकने वाला संशोधन विधेयक भी संसद से पारित हुआ।

20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर विपक्ष का हमला
विपक्ष का आरोप है कि 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर सरकार जवाब देने से बच रही है। यह प्रदर्शन उन छात्रों के समर्थन में किया गया, जो जंतर-मंतर पर वर्ष 2026 के NEET पेपर लीक मामले को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री से संसद में इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत बयान देने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
राहुल गांधी और खड़गे ने उठाए सवाल
एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि यह कार्रवाई गृह मंत्री की अनुमति से हुई है तो जवाबदेही तय होनी चाहिए और यदि बिना जानकारी के हुई है, तब भी यह प्रशासनिक विफलता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई।
राम मंदिर चंदा विवाद पर भी विपक्ष का प्रदर्शन
छात्र आंदोलन के अलावा विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर भी संसद परिसर में प्रदर्शन किया। विपक्ष का कहना है कि इस मामले की भी पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
इन मुद्दों को लेकर संसद परिसर में लगातार राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं, जबकि दोनों सदनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी रही।
पेपर लीक रोकने के लिए संशोधन विधेयक को मिली मंजूरी
इसी बीच संसद ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। राज्यसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक संसद से पास हो गया।
संशोधित कानून के तहत परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के मामलों में सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के गठन और मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का भी प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।


