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कर्नल सोफिया कुरैशी केस: सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार से पूछा, अब तक मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी क्यों नहीं?

कोर्ट ने सरकार को दो हफ्ते में निर्णय लेने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही SIT को पुराने मामलों की जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। मामला कानून के तहत समय पर कार्रवाई की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर है।

कर्नल सोफिया कुरैशी केस: सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार से पूछा, अब तक मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी क्यों नहीं?
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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के भाजपा मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ जांच पूरी हो जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक अभियोजन की मंजूरी न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त सवाल उठाए हैं।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि विशेष जांच टीम (SIT) ने अगस्त 2025 में ही अपनी जांच पूरी कर ली थी और राज्य सरकार से अभियोजन (केस चलाने) की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि कानून के तहत सरकार पर समय पर निर्णय लेने की वैधानिक जिम्मेदारी है। सुनवाई के दौरान CJI ने सीधे तौर पर पूछा, 'क्या हम सही समझ रहे हैं कि SIT ने राज्य सरकार से कार्रवाई के लिए अनुमति मांगी है और सरकार अब तक उस पर चुप बैठी हुई है?'

कोर्ट में मौजूद एसआईटी के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें अब डीआईजी इंटेलिजेंस के तौर पर नियुक्त किया गया है। इस पर कोर्ट ने SIT की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में दो पुराने मामलों का भी जिक्र है, उनमें एक नवंबर 2020 का और दूसरा उससे पहले का। हालांकि, इन मामलों को मौजूदा जांच में शामिल नहीं किया गया।

सीजेआई ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि समय की कमी के कारण अगर उन मामलों को छोड़ा गया है तो SIT को उम्मीद है कि वो उन आरोपों की भी जांच पूरी करेगी। कोर्ट ने ये भी रिकॉर्ड किया कि SIT का गठन खुद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ था और पूरी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी गई है। रिपोर्ट के पैरा 10.2 में कुछ पुराने बयानों का जिक्र है, जिन्हें फिलहाल बाहर रखा गया।

SIT ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 217 के तहत राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजकर अभियोजन की पूर्व अनुमति मांगी थी, जो कि किसी मंत्री के खिलाफ कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के लिए जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, 'राज्य सरकार को कानून के मुताबिक अभियोजन की मंजूरी देने या न देने पर फैसला करना ही होगा।'

कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वो दो हफ्ते के भीतर अभियोजन की मंजूरी पर फैसला लेकर अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे। इसके साथ ही SIT को ये भी निर्देश दिया गया है कि वो रिपोर्ट में बताए गए अन्य पुराने मामलों की भी जांच कर रिपोर्ट सौंपे। मामले की अगली सुनवाई अब राज्य सरकार की अनुपालन रिपोर्ट और SIT की अतिरिक्त जांच रिपोर्ट के बाद होगी।


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