तलाकशुदा पत्नी को गुजारा-भत्ता नहीं दी तो सैलरी से कटेगी रकम, ओडिशा सरकार का बड़ा आदेश
ओडिशा सरकार ने आदेश दिया है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद तलाकशुदा पत्नी या बच्चों को एलिमनी नहीं देने वाले सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से रकम काटकर सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी।

सरकार का यह फैसला उन मामलों को देखते हुए लिया गया है, जिनमें अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद कर्मचारियों द्वारा गुजारा-भत्ता देने में लापरवाही की शिकायतें सामने आ रही थीं।
सीएम शिकायत सेल तक पहुंच रहे ऐसे मामले
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शिकायत सुनवाई के दौरान हर बार ऐसे दो-तीन मामले सामने आते हैं, जिनमें सरकारी कर्मचारी अदालत के आदेश के बावजूद अपनी तलाकशुदा पत्नी या बच्चों को नियमित गुजारा-भत्ता नहीं दे रहे होते हैं।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को वेतन से रकम काटकर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारी होने के नाते अदालत के आदेश की अवहेलना स्वीकार नहीं की जा सकती। तलाकशुदा महिलाओं और बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार भी उचित नहीं है।
कैसे कटेगी कर्मचारी की सैलरी?
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने भुगतान की प्रक्रिया भी स्पष्ट की है। अदालत से गुजारा-भत्ता देने का आदेश मिलने के बाद संबंधित डिविजनल डीडीओ कर्मचारी का मासिक वेतन बिल तैयार करेगा।
वेतन तैयार करते समय अदालत द्वारा निर्धारित गुजारा-भत्ते की रकम कर्मचारी की सैलरी से काट ली जाएगी। इसके बाद यह राशि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सीधे तलाकशुदा महिला या बच्चे के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी। इससे भुगतान में देरी या कर्मचारी की ओर से जानबूझकर की जाने वाली अनदेखी को रोकने की कोशिश होगी।
एचआरएमएस में भी किया जाएगा बदलाव
सरकार ने गुजारा-भत्ता से जुड़े मामलों को बेहतर तरीके से ट्रैक करने के लिए मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) में भी आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों में रिकॉर्ड रखने और वेतन कटौती की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
महिलाओं और बच्चों को मिलेगी राहत
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अदालत के आदेशों का प्रभावी तरीके से पालन कराया जा सकेगा। साथ ही उन महिलाओं और बच्चों को भी राहत मिलेगी, जिन्हें अदालत से गुजारा-भत्ता निर्धारित होने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा था।
नए निर्देश के बाद सरकारी कर्मचारियों के लिए अदालत द्वारा निर्धारित एलिमनी का भुगतान टालना मुश्किल होगा। वेतन से सीधे कटौती की व्यवस्था से भुगतान की प्रक्रिया नियमित और अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है।


