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नोएडा हिंसा मामले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, यूपी एटीएफ ने तमिलनाडु से पकड़ा

नोएडा में वर्कर्स के हिंसक प्रदर्शन मामले में उत्तर प्रदेश की एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता को दबोच लिया है। पुलिस ने उसे तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है।

नोएडा हिंसा मामले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, यूपी एटीएफ ने तमिलनाडु से पकड़ा
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नई दिल्ली। नोएडा में हिंसक प्रदर्शन मामले में उत्तर प्रदेश की एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद को दबोच लिया है। पुलिस ने उसे तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। इससे पहले पुलिस ने बताया था कि नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच में कई खुलासे हुए है।

जांच में पता चला है कि हिंसा फैलाने के लिए कथित तौर पर 80 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सुनियोजित तैयारी की गई थी।अधिकारियों के अनुसार, जांच में पता चला है कि हिंसा भड़काने के लिए तीन दिन से कई स्तरों पर तैयारी हो रही थी। सोशल मीडिया से लेकर औद्योगिक इलाकों में घूमते हुए कुछ लोगों ने पूरा माहौल तैयार किया। इसके पीछे तीन संगठनों के नाम सामने आए हैं, जिनमें 'मजदूर बिगुल दस्ता' प्रमुख है। पुलिस ने इस संगठन के प्रमुख रूपेश राय को गिरफ्तार करने के साथ ही श्रमिकों को भड़काने वाले 18 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था।

80 से ज्यादा व्हाट्सऐप ग्रुप पर हिंसा भड़काने वाले मैसेज

पुलिस उपायुक्त शैव्या गोयल ने बताया कि श्रमिकों के प्रदर्शन से पहले तीन दिन के भीतर 80 से ज्यादा व्हाट्सऐप ग्रुप तैयार किए गए, जिनमें से करीब 50 ग्रुप की जानकारी पुलिस को मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इनमें से 17 ग्रुप का सत्यापन किया गया है, जिनमें हिंसा भड़काने वाले मैसेज साझा किए गए थे।

गोयल के अनुसार, इन ग्रुप में श्रमिकों की वास्तविक मांगों जैसे वेतन वृद्धि या कार्य स्थिति में सुधार को लेकर कोई चर्चा नहीं थी। इसके बजाय कर्मचारियों को उकसाने, भीड़ जुटाने और कारखानों में तोड़फोड़ करने जैसी बातें लिखी जा रही थीं। पुलिस ने कहा कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था और जांच के बाद 'मजदूर बिगुल दस्ता' संगठन से जुड़े रूपेश राय समेत 18 लोगों की गिरफ्तारी हुई।

तीन समूहों की भूमिका

नोएडा की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने कहा कि श्रमिकों के प्रदर्शन को हिंसक बनाने में मुख्य रूप से तीन समूहों की भूमिका सामने आई है, और अब तक 17 व्हाट्सऐप ग्रुप वेरिफाई किए जा चुके हैं। सिंह ने कहा कि मामले में जांच अभी जारी है तथा आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि मजदूर बिगुल दस्ते से जुड़े लोग औद्योगिक क्षेत्रों में घूम-घूमकर मजदूरों को भड़काने का काम कर रहे थे।

इस संगठन का नाम इससे पहले हरियाणा के मानेसर में हुई औद्योगिक हिंसा में भी सामने आया था।पुलिस ने कहा कि डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में काम किया जा रहा है, और अन्य एजेंसियां भी जांच में जुटी हैं। जांच के दौरान पुलिस को 50 से अधिक संदिग्ध 'एक्स' हैंडल की जानकारी मिली, जो हिंसा से एक-दो दिन पहले ही बनाए गए थे।


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