दुनिया पर मंडरा रहा खाद्य संकट का खतरा, निर्मला सीतारमण ने बताई बड़ी वजह; भारत ने उठाए ये कदम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Hormuz और Bab el-Mandeb जैसे समुद्री मार्गों में व्यवधान से वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर खतरे की चेतावनी दी। जानिए भारत ने खाद और शिपिंग संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए।

नई दिल्ली। दुनिया पहले से ही ऊर्जा और व्यापार संबंधी चुनौतियों से जूझ रही है और अब खाद्य सुरक्षा पर भी संकट का खतरा बढ़ता दिख रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में होर्मुज स्ट्रेट और अन्य प्रमुख समुद्री मार्गों में व्यवधान को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन रास्तों से खाद और दूसरी जरूरी वस्तुओं की आवाजाही प्रभावित होने का सीधा असर वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मन्देब पर बढ़ी चिंता
निर्मला सीतारमण के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मन्देब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में लंबे समय तक व्यवधान रहने से खाद की आपूर्ति और उसकी लागत दोनों प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने मलक्का स्ट्रेट का भी जिक्र करते हुए कहा कि फिलहाल वहां कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन अगर इस रास्ते पर भी बाधा आती है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
दरअसल, खाद्य उत्पादन के लिए उर्वरक बेहद महत्वपूर्ण हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्वरक की कीमतों और परिवहन लागत में बढ़ोतरी किसानों तथा खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा सकती है। UNCTAD ने भी होर्मुज क्षेत्र में व्यवधान से ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति प्रभावित होने तथा खाद्य उत्पादन और कीमतों पर जोखिम बढ़ने की बात कही है।
भारत ने बनाया शिपिंग आपातकालीन कोष
वित्त मंत्री ने बताया कि संकट के बीच भारत ने शिपिंग शिपमेंट के लिए अलग शिपिंग आपातकालीन कोष बनाया है। इसका उद्देश्य उन जहाजों की मदद करना है, जो उर्वरक लेकर भारत पहुंच रहे हैं और जिन्हें बढ़ते बीमा प्रीमियम तथा शिपिंग लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सीतारमण ने कहा कि महंगी खाद, सीमित शिपिंग क्षमता और बढ़े हुए बीमा जोखिम के कारण कई देशों के लिए उर्वरक खरीदना मुश्किल हो रहा है। भारत घरेलू स्तर पर यूरिया और फॉस्फेट उत्पादन बढ़ाने की कोशिश भी कर रहा है, लेकिन नई क्षमता विकसित करने में समय लगेगा।
भारत सरकार पहले भी पश्चिम एशिया संकट के बीच उर्वरक आपूर्ति, वैकल्पिक आयात स्रोतों और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर कदम उठाने की बात कह चुकी है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पर भी बड़ा अपडेट
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में वित्त मंत्री ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन वार्ता एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई है जहां आगे और रियायत देना या लेना दोनों पक्षों के लिए काफी मुश्किल हो सकता है।
सीतारमण ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार असंतुलन कम करने के लिए मौजूदा वार्ता से अलग दूसरे उपायों पर भी विचार कर रहा है। भारत और अमेरिका फरवरी 2025 से व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। हालिया बातचीत में बाजार पहुंच, शुल्क और व्यापार संतुलन जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं।
इस तरह एक ओर समुद्री मार्गों में व्यवधान से खाद और खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता भी महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और खाद्य सुरक्षा आने वाले समय में बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती है।


