Top
Begin typing your search above and press return to search.

लिपुलेख मार्ग पर नेपाल की नई आपत्ति, कैलाश मानसरोवर यात्रा समझौते में भागीदारी की उठाई मांग

नेपाल ने भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर हुए समझौते पर आपत्ति जताई है। नेपाल का कहना है कि लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र उसके हैं, इसलिए इस मार्ग से जुड़े किसी भी फैसले में उसे शामिल किया जाना चाहिए।

लिपुलेख मार्ग पर नेपाल की नई आपत्ति, कैलाश मानसरोवर यात्रा समझौते में भागीदारी की उठाई मांग
X
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर हुए समझौते पर नेपाल ने एक बार फिर आपत्ति दर्ज कराई है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि इस यात्रा मार्ग से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में नेपाल को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि यात्रा का एक हिस्सा उन क्षेत्रों से जुड़ा है, जिन पर नेपाल अपना अधिकार जताता रहा है।

लिपुलेख और कालापानी को लेकर जताई चिंता

भारत दौरे पर आए नेपाल के विदेश मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नेपाल ने अपनी चिंताओं से भारत और चीन दोनों को अवगत कराया है। उनके अनुसार कैलाश मानसरोवर यात्रा के विभिन्न मार्गों में कुछ ऐसे क्षेत्र शामिल हैं, जिन्हें नेपाल अपना हिस्सा मानता है। उन्होंने विशेष रूप से लिपुलेख और कालापानी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन इलाकों से जुड़े किसी भी समझौते में नेपाल की सहमति आवश्यक है।

विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल लंबे समय से इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है और इस मुद्दे को लगातार दोनों देशों के समक्ष उठाता रहा है।

पहले भी उठा चुका है यह मुद्दा

नेपाल इससे पहले भी कई बार लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों पर दावा जता चुका है। पिछले वर्षों में नेपाल सरकार ने नया राजनीतिक नक्शा जारी कर इन इलाकों को अपने क्षेत्र में दर्शाया था। हाल ही में नेपाल सरकार के कुछ वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों ने भी इन क्षेत्रों पर अपना दावा दोहराया था।

हालांकि भारत लगातार इन दावों को खारिज करता रहा है और स्पष्ट करता आया है कि लिपुलेख उत्तराखंड का अभिन्न हिस्सा है तथा इस क्षेत्र पर लंबे समय से भारत का प्रशासनिक नियंत्रण रहा है।

क्या है पूरा सीमा विवाद?

भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद मुख्य रूप से कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को लेकर है। नेपाल का तर्क है कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार काली नदी के पूर्व में स्थित यह क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। वहीं भारत का कहना है कि ऐतिहासिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड इन क्षेत्रों को भारतीय भूभाग साबित करते हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा का महत्व

तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के प्रयासों के तहत हाल के वर्षों में यात्रा को फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है। इस वर्ष जून से अगस्त तक यात्रा के संचालन के लिए उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला दर्रे को प्रमुख मार्गों के रूप में तय किया गया है।

नेपाल ने साथ ही यह भी कहा है कि वह सीमा विवाद का समाधान भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से चाहता है और इस मुद्दे पर शांतिपूर्ण संवाद को सबसे बेहतर रास्ता मानता है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it