नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, सुरंगों में फंसे 900 श्रमिक; रेस्क्यू टीम कर रही त्रिशूली-3ए सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद 900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। त्रिशूली-3ए सुरंग में बचाव दल ने रास्ता बनाया और ऑक्सीजन-खाना पहुंचाया।

त्रिशूली-3ए सुरंग तक पहुंचा बचाव दल
ऊपरी त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे कर्मचारियों और इंजीनियरों को निकालने के लिए नेपाली सेना के नेतृत्व में करीब 90 सदस्यीय संयुक्त टीम अभियान चला रही है। इसमें 66 नेपाली सेना के जवान, प्रशिक्षित कुत्तों के साथ विशेषज्ञ खोज एवं बचाव दल, 18 सशस्त्र पुलिस बल के जवान और छह नेपाल पुलिसकर्मी शामिल हैं।
रविवार दोपहर करीब दो बजे बचाव दल सुरंग के ऊपरी हिस्से यानी ‘क्राउन हेड’ तक पहुंचने में सफल रहा। यहां लगभग 2×3 फीट का एक छोटा रास्ता बनाया गया। बचावकर्मी रस्सियों के सहारे सुरंग के अंदर उतरे और फंसे लोगों को आवाज लगाकर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला।
ऑक्सीजन और खाना पहुंचाने की कोशिश
सुरंग के अंदर फंसे लोगों के जिंदा होने की उम्मीद में बचाव दल ने ऊर्ध्वाधर रास्ते से ऑक्सीजन और हवा पहुंचानी शुरू कर दी है। अंदर की स्थिति का पता लगाने के लिए कैमरा भी भेजा गया है। साथ ही खाने का सामान भी सुरंग के भीतर पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
मलबा बेहद ज्यादा होने के कारण बचाव दल रास्ते को चौड़ा करने में जुटा है। भारी मशीनों और नियंत्रित विस्फोटों की मदद से सुरंग के अंदर जाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि प्रवेश मार्ग खुलने के बाद फंसे लोगों की तलाश और उन्हें बाहर निकालने का अभियान तेज हो सकेगा।
हेलीकॉप्टर से पहुंचाई गईं मशीनें
बाढ़ में परियोजना तक जाने वाली सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। ऐसे में खुदाई करने वाली मशीनों और बुलडोजरों को मौके तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया। नेपाली सेना ने भारी उपकरणों को अलग-अलग हिस्सों में खोलकर हेलीकॉप्टर के जरिए नुवाकोट के बट्टार और फिर परियोजना स्थल तक पहुंचाया।
बचाव दल एक्सकेवेटर, ड्रिलिंग मशीन, हाइड्रोलिक कटर और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाने में लगा है। हालांकि लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण अभियान में रुकावट आ रही है।
752 लोगों की मौत, 2,500 से ज्यादा लापता
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार प्राकृतिक आपदा में अब तक 752 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,502 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव कार्य में लगभग 20 हजार सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है और करीब 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। लापता लोगों में 933 हाइड्रोपावर कर्मचारी शामिल हैं।
ग्लेशियर टूटने के बाद मचा हाहाकार
बताया गया है कि हिमालयी क्षेत्र में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद भारी मात्रा में चट्टान और मलबा नीचे आया। इसके बाद पानी और मलबे का तेज बहाव लेंदे नदी से होते हुए नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों तक पहुंचा। त्रिशूली नदी का जलस्तर महज 30 मिनट में करीब नौ मीटर तक बढ़ गया।
आपदा का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी हुआ है। वहां भी मौतों और लोगों के लापता होने की खबर है। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस समेत कई देशों और संगठनों ने नेपाल को राहत सहायता देने की पेशकश की है। फिलहाल बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।


