बिहार-असम में प्रदर्शनकारियों की रिहाई का रास्ता साफ, सीजेपी-सरकार की आधी रात बैठक के बाद बड़ा दावा
नीट पेपर लीक आंदोलन के बाद बिहार और असम में प्रदर्शनकारियों की रिहाई और एफआईआर वापसी की प्रक्रिया शुरू। सीजेपी और सरकार की आधी रात बैठक में कई अहम दावे, जबकि पश्चिम बंगाल में अब भी आदेश का इंतजार।

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बाद अब प्रदर्शनकारियों को राहत मिलने लगी है। बिहार और असम सरकार ने आंदोलन से जुड़े छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने तथा हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
वहीं पश्चिम बंगाल में अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं होने से वहां के छात्रों और उनके परिवारों में असमंजस बना हुआ है। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच देर रात हुई बैठक के बाद कई अहम दावों ने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है।
आधी रात चली बैठक, CJP ने साझा किया बड़ा अपडेट
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दौस ने देर रात सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटे बाद सरकार के प्रतिनिधियों के साथ करीब दो से तीन घंटे तक बैठक हुई। उनके अनुसार बैठक में बिहार और असम सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं की प्रतियां सौंपी गईं, जिनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, भविष्य में किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने और हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करने का आश्वासन दिया गया है।
सौरव दौस ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार और अन्य भाजपा तथा एनडीए शासित राज्यों की ओर से भी इसी प्रकार की अधिसूचनाएं जल्द जारी किए जाने का भरोसा दिया गया है। उन्होंने कहा कि संगठन प्रत्येक प्रदर्शनकारी के साथ खड़ा है और किसी को भी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
बिहार सरकार का बड़ा फैसला
बिहार सरकार ने छात्रों को राहत देते हुए 26 जुलाई शाम 6 बजे तक दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। गृह विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि आंदोलन से जुड़े किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
इसके साथ ही जिन लोगों को पहले दर्ज मामलों के आधार पर हिरासत में लिया गया था, उन्हें तत्काल प्रभाव से रिहा करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। जानकारी के अनुसार बिहार बंद के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें अब राहत मिलने की उम्मीद है।
कानूनी सहायता के लिए 1 करोड़ रुपये का फंड
प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों का सामना कर रहे छात्रों की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने 1 करोड़ रुपये के लीगल फंड की घोषणा की है। इस फंड का उद्देश्य जरूरतमंद छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना बताया गया है।
इधर, कॉकरोच जनता पार्टी ने भी एक ऑनलाइन एविडेंस गैदरिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जहां प्रदर्शन से जुड़े वीडियो, फोटो और अन्य दस्तावेज एकत्र किए जाएंगे। संगठन का कहना है कि इससे भविष्य की कानूनी प्रक्रिया में मदद मिलेगी।
पश्चिम बंगाल में बना हुआ है सस्पेंस
जहां बिहार और असम में सकारात्मक पहल देखने को मिली है, वहीं पश्चिम बंगाल में अभी तक प्रदर्शनकारियों की रिहाई को लेकर कोई स्पष्ट सरकारी आदेश सामने नहीं आया है। इससे वहां गिरफ्तार छात्रों के परिजनों की चिंता बनी हुई है।
उधर बिहार में प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से बिना अनुमति आधुनिक हथियार का इस्तेमाल करने के आरोप में एक पुलिसकर्मी को निलंबित किए जाने की भी खबर सामने आई है। मामले की विभागीय जांच जारी है।
सीजेपी ने साफ कहा है कि यदि सरकारों ने अपने वादे पूरे नहीं किए और सभी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो संगठन फिर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा।


