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टिकट न मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने दिखाई एकजुटता, शिवसेना यूबीटी के प्रस्ताव को ठुकराया

दतिया उपचुनाव में टिकट न मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए शिवसेना यूबीटी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में सक्रिय प्रचार का भी ऐलान किया।

टिकट न मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने दिखाई एकजुटता, शिवसेना यूबीटी के प्रस्ताव को ठुकराया
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भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद उठी अटकलों पर विराम लगाते हुए पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है। दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका राजनीतिक जीवन भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा है और वे भविष्य में भी इसी दल के साथ रहेंगे।

हाल के दिनों में यह चर्चा तेज थी कि टिकट कटने से उनके समर्थकों में नाराजगी है और विपक्षी दल उन्हें अपने पाले में लाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में शिवसेना (यूबीटी) की ओर से कथित तौर पर उन्हें चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिए जाने की बात सामने आई थी। मिश्रा ने इस पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी अन्य दल में जाने के बारे में सोच भी नहीं सकते।

समर्थकों की नाराजगी पर किया संवाद

मिश्रा ने बताया कि उन्होंने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से बातचीत कर स्थिति को सामान्य बना लिया है। उनके अनुसार, टिकट न मिलने के कारण जो क्षणिक आक्रोश था, वह अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने में जुटेंगे।

उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने भी स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर उन्हें एकजुट रहने का संदेश दिया है। नामांकन प्रक्रिया और आगामी चुनाव प्रचार में वे स्वयं सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

पार्टी नेतृत्व ने संभाला मोर्चा

दतिया में उपजे असंतोष को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और अन्य नेताओं ने मिश्रा से चर्चा की। इसके बाद कई दौर की बैठकों का आयोजन हुआ, जिनमें चुनावी रणनीति के साथ-साथ कार्यकर्ताओं की भावनाओं को भी समझा गया।

भाजपा नेताओं का कहना है कि संगठन की प्राथमिकता चुनाव में एकजुटता बनाए रखना और विकास के मुद्दों को जनता तक पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से वरिष्ठ नेताओं को क्षेत्र में भेजा गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा का सार्वजनिक रूप से पार्टी के साथ खड़े होने का संदेश दतिया उपचुनाव में भाजपा के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। इससे कार्यकर्ताओं के बीच फैली अनिश्चितता भी काफी हद तक दूर हुई है।


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