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मॉनसून पर लगा ब्रेक, यूपी-बिहार से दिल्ली-NCR तक बढ़ी उमस; जानें कब होगी झमाझम बारिश की वापसी

देशभर में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। यूपी, बिहार, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में बारिश की कमी से उमस और किसानों की चिंता बढ़ी। जानिए IMD का ताजा अपडेट और कब लौटेगी बारिश।

मॉनसून पर लगा ब्रेक, यूपी-बिहार से दिल्ली-NCR तक बढ़ी उमस; जानें कब होगी झमाझम बारिश की वापसी
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नई दिल्ली। देश के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून की रफ्तार फिलहाल थम सी गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब समेत कई राज्यों में पिछले एक सप्ताह से अच्छी बारिश नहीं होने के कारण उमस और गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से किसान भी चिंतित हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार यह स्थिति स्थायी नहीं है और जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने की संभावना है।

जुलाई में सामान्य से काफी कम हुई बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जुलाई के पहले पखवाड़े में देश के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 20 से 35 प्रतिशत तक बारिश की कमी देखी गई। जून में अच्छी प्री-मॉनसून और शुरुआती बारिश के बाद जुलाई में अचानक आई सुस्ती ने मौसम का पूरा समीकरण बदल दिया।

15 जुलाई तक पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में करीब 348 मिमी वर्षा दर्ज हुई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि तक लगभग 540 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। यानी यहां लगभग 36 प्रतिशत की कमी रही।

उत्तर-पश्चिम भारत में लगभग 19 प्रतिशत, मध्य भारत में 13 प्रतिशत और दक्षिण भारत में 26 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। पूरे देश में अब तक लगभग 227 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य औसत 294.2 मिमी माना जाता है। इस तरह देशभर में कुल वर्षा लगभग 23 प्रतिशत कम रही।

मॉनसून ट्रफ के खिसकने से बदला मौसम

विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश में कमी की सबसे बड़ी वजह मॉनसून ट्रफ लाइन का हिमालय की ओर खिसक जाना है। इसके चलते वर्षा लाने वाली हवाएं मैदानी इलाकों से हट गई हैं और उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में शुष्क मौसम बना हुआ है।

हालांकि असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और कुछ अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में अच्छी बारिश जारी है, लेकिन दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में बादल सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं।

अल नीनो और बंगाल की खाड़ी भी बने कारण

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो का असर भी भारतीय मॉनसून पर पड़ रहा है। समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से मॉनसूनी हवाओं की ताकत कमजोर हो गई है।

इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में पिछले कुछ दिनों से कोई प्रभावी कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) विकसित नहीं हुआ। सामान्यतः जुलाई में ऐसे सिस्टम लगातार बनते हैं और उत्तर भारत तक बारिश पहुंचाते हैं। इस बार इनकी कमी से मॉनसून कमजोर पड़ गया।

किसानों की बढ़ी चिंता

बारिश में आई कमी का सबसे अधिक असर खेती पर पड़ रहा है। धान, मक्का, दालों और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने लगी है। कई इलाकों में सिंचाई पर निर्भरता बढ़ गई है, जिससे किसानों की लागत भी बढ़ने की आशंका है।

कब लौटेगी बारिश?

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार मॉनसून पर लगा यह ब्रेक अधिक समय तक नहीं रहेगा। बंगाल की खाड़ी में जल्द ही नया मौसमी सिस्टम बनने की संभावना है, जिससे मॉनसूनी हवाएं फिर सक्रिय होंगी।

आईएमडी का अनुमान है कि 16 से 20 जुलाई के बीच दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जुलाई के अंतिम सप्ताह तक अच्छी वर्षा होने पर मौजूदा कमी की आंशिक भरपाई होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मौसम विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अगस्त में अल नीनो का प्रभाव कुछ कमजोर पड़ सकता है, जिससे देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से बेहतर बारिश की संभावना बनेगी।


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