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उत्तर-पश्चिम भारत में थमेगी बारिश, पूर्वी राज्यों में तेज होगा मानसून का असर, जानें- मौसम विभाग का ताता अपडेट

मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने से उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश कम होगी, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल में अगले कुछ दिनों तक अच्छी वर्षा की संभावना है।

उत्तर-पश्चिम भारत में थमेगी बारिश, पूर्वी राज्यों में तेज होगा मानसून का असर, जानें- मौसम विभाग का ताता अपडेट
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नई दिल्ली। देशभर में सक्रिय मानसून अब अगले कुछ दिनों के लिए अपना स्वरूप बदलने जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसूनी ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने से उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां कमजोर पड़ेंगी, जबकि पूर्वी और पहाड़ी राज्यों में बारिश का दौर तेज होने की संभावना है।

पूर्वी राज्यों में बढ़ेगी वर्षा

मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में अगले चार से पांच दिनों तक अच्छी बारिश हो सकती है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं फिलहाल इन्हीं क्षेत्रों की ओर केंद्रित हो रही हैं, जिससे यहां व्यापक वर्षा के अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं।

मैदानी इलाकों में मानसून ‘ब्रेक’ की स्थिति

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश का क्रम कुछ समय के लिए धीमा पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून ट्रफ के दोबारा दक्षिण की ओर लौटने तक इन क्षेत्रों में वर्षा की संभावना सीमित रहेगी। दिल्ली और आसपास के इलाकों में मौसम साफ रहने से तापमान में वृद्धि हो सकती है।

पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी वर्षा की आशंका बनी हुई है। मौसम विभाग ने भूस्खलन और अचानक बाढ़ की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। छत्तीसगढ़ में भी अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने का अनुमान है।

खेती पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के इस अस्थायी विराम से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है। जून में देशभर में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई थी, जिससे कृषि गतिविधियां पहले ही प्रभावित हुई हैं। हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश ने कुछ राहत अवश्य दी है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरे मानसून सीजन की स्थिति का आकलन वर्षा के समग्र वितरण और समुद्री परिस्थितियों के आधार पर ही किया जा सकेगा। फिलहाल किसानों और प्रशासन को बदलते मौसम के रुख पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है।


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