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मोनालिसा नाबालिग विवाह मामला: फरमान खान की अग्रिम जमानत खारिज, POCSO कोर्ट के फैसले से बढ़ीं मुश्किलें

मोनालिसा नाबालिग विवाह मामले में फरमान खान को बड़ा झटका। विशेष POCSO कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। जन्म प्रमाण पत्र और सरकारी रिकॉर्ड की जांच में नए तथ्य सामने आए।

मोनालिसा नाबालिग विवाह मामला: फरमान खान की अग्रिम जमानत खारिज, POCSO कोर्ट के फैसले से बढ़ीं मुश्किलें
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खरगोन। महाकुंभ के दौरान चर्चा में आईं मोनालिसा से कथित विवाह के मामले में फरमान खान की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले स्थित मंडलेश्वर की विशेष POCSO अदालत ने फरमान खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि मामले की गंभीरता, आरोपी के फरार होने की आशंका और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना को देखते हुए उसे अग्रिम राहत देना उचित नहीं होगा।

फरमान खान पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से नाबालिग मोनालिसा को केरल ले जाकर विवाह किया। इस संबंध में मोनालिसा के माता-पिता की शिकायत पर महेश्वर थाने में मामला दर्ज किया गया था। अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई तेज होने की संभावना है।

कई धाराओं में दर्ज है मामला, पुलिस ने कोर्ट में पेश की केस डायरी

महेश्वर पुलिस ने अदालत में विस्तृत केस डायरी और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। पुलिस के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

अदालत के समक्ष पुलिस ने तर्क दिया कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी को अग्रिम जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर विशेष अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

जांच में सामने आई जन्मतिथि, विवाह के समय बताई गई नाबालिग

जांच की शुरुआत केरल के उस मंदिर से हुई, जहां कथित तौर पर दोनों का विवाह संपन्न हुआ था। जांच अधिकारियों के मुताबिक, विवाह के समय प्रस्तुत आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर शादी कराई गई थी। बाद में दस्तावेजों की जांच में जन्मतिथि को लेकर विसंगति सामने आई।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के निर्देश पर गठित जांच दल ने केरल और मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड का सत्यापन किया। सरकारी अस्पताल और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर जांच में यह पाया गया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। इस आधार पर 11 मार्च 2026 को विवाह के समय उनकी उम्र लगभग 16 वर्ष बताई गई।

जांच में यह भी सामने आया कि पहले जारी किए गए एक जन्म प्रमाण पत्र में अलग जन्मतिथि दर्ज थी। संबंधित दस्तावेज की वैधता की भी जांच की गई और स्थानीय प्रशासन को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

जांच जारी, आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर

जांच एजेंसियां अब कथित रूप से इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों, विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया और अन्य परिस्थितियों की भी पड़ताल कर रही हैं। आयोग की जांच टीम ने परिजनों से दस्तावेज जुटाकर जाति प्रमाण पत्र और अन्य अभिलेखों का भी सत्यापन किया है।

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अदालत द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बाद फरमान खान के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज हो सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।


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