'विदेश में विविधता स्वीकार, देश में बर्दाश्त नहीं', मोहन भागवत के बयान पर कपिल सिब्बल और ओवैसी का हमला
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में विविधता पर दिए बयान पर कपिल सिब्बल और असदुद्दीन ओवैसी ने हमला बोला। दोनों नेताओं ने आरएसएस की विचारधारा और उसके रुख पर सवाल उठाए।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए विविधता से जुड़े बयान पर भारत में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भागवत के बयान को लेकर आरएसएस पर निशाना साधा है। सिब्बल ने तंज कसते हुए कहा कि भागवत का भाषण सुनकर उन्हें लगा कि कहीं यह राहुल गांधी का भाषण तो नहीं है। वहीं, ओवैसी ने आरएसएस की विचारधारा और उसके सार्वजनिक बयानों के बीच कथित अंतर को लेकर सवाल खड़े किए।
अमेरिका में भागवत ने विविधता को बताया भारत के डीएनए का हिस्सा
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में भारतीय-अमेरिकी समुदाय और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को संबोधित किया था। ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत की पहचान एकता और विविधता दोनों से जुड़ी है।
भागवत ने कहा कि विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए और अलग-अलग पहचान, विचारों तथा परंपराओं का सम्मान एवं स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने एकता की भावना को भी समान रूप से महत्वपूर्ण बताया। इससे पहले उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह जाएगा।
सिब्बल बोले- देश में विविधता को लेकर क्या हुआ?
भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि विदेश में विविधता को स्वीकार करने की बात कही जाती है, लेकिन भारत में क्या वास्तव में उसी भावना के अनुरूप व्यवहार किया जाता है?
सिब्बल ने मॉब लिंचिंग और जंतर-मंतर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या RSS प्रमुख ने ऐसे मामलों में सरकार के खिलाफ कभी आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि केवल भाषण देने से बात पूरी नहीं होती, बल्कि जमीन पर भी विविधता, सम्मान और समानता की रक्षा दिखाई देनी चाहिए।
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का संदर्भ देते हुए भी सिब्बल ने भागवत से सवाल किए। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS जिस राजनीति का समर्थन करता है, उसमें देश की विविधता को लेकर विरोधाभास दिखाई देता है। इससे पहले सिब्बल ने सोशल मीडिया पर भी कहा था कि विदेश में दिए गए समझदारी भरे शब्द तभी मायने रखते हैं, जब काम भी उसी दिशा में हो।
ओवैसी ने आरएसएस की विचारधारा पर उठाए सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने भी भागवत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस दुनिया के सामने एक संदेश देता है, जबकि उसके सदस्यों और समर्थकों के बीच अलग तरह की विचारधारा रखी जाती है।
ओवैसी ने आरएसएस संस्थापक केबी हेडगेवार और पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर के लेखन का हवाला देते हुए संघ की विचारधारा पर सवाल उठाए। उन्होंने गोलवलकर की पुस्तक ‘Bunch of Thoughts’ में मुसलमानों और ईसाइयों से जुड़े विचारों का उल्लेख किया और कहा कि जनता को संघ की विचारधारा के विभिन्न पक्षों को खुद समझने का अवसर मिलना चाहिए।
ओवैसी ने गुजरात दंगों, समान नागरिक संहिता (यूसीसी), धर्मांतरण विरोधी कानूनों और यूएपीए जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सावरकर, हेडगेवार और गोलवलकर के लेखन के संदर्भों को सामने रखकर जनता को तय करना चाहिए कि आरएसएस की विचारधारा वास्तव में क्या कहती है।


