मोदी सरकार में मंत्रियों के बंगलों पर 547 करोड़ रुपये खर्च, सीजेपी ने पूछा- स्कूल कब सुधरेंगे?
केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव पर ₹547.68 करोड़ खर्च होने के दावे पर सीजेपी ने सवाल उठाए। भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया।

2025-26 में बंगलों पर खर्च ₹92 करोड़ पहुंचा
एक रिपोर्ट में आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर 2014-15 में करीब ₹27 करोड़ खर्च हुए थे। यह रकम 2025-26 में बढ़कर करीब ₹92 करोड़ हो गई। सीजेपी ने इसी आंकड़े को आधार बनाकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया है।
पार्टी का कहना है कि सरकारी स्कूलों में कई जगह बिजली, पीने का पानी, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। ऐसे में सरकारी धन के इस्तेमाल की प्राथमिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
‘बंगले नहीं, स्कूल ठीक करो’
सीजेपी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि आलीशान सरकारी बंगलों के रखरखाव पर होने वाले खर्च को स्कूलों की सुविधाएं बेहतर करने में लगाया जाना चाहिए। पार्टी के मुताबिक, 2014 से 2019 के बीच मंत्रियों के आवासों के रखरखाव पर करीब ₹133.9 करोड़, 2019 से 2024 के बीच ₹250 करोड़ और 2024 से 2026 के बीच करीब ₹174.5 करोड़ खर्च हुए।
पार्टी ने इस मुद्दे को अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से भी जोड़ा है। सीजेपी का दावा है कि अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। पार्टी बिजली, पेयजल, शौचालय, मिड-डे मील और बच्चों के आवागमन जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठा रही है।
पीएम केयर्स फंड पर भी उठाए सवाल
सीजेपी ने इससे पहले पीएम केयर्स फंड को लेकर भी सवाल उठाए थे। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की सुविधाएं सुधारने के लिए इस राशि के इस्तेमाल पर सवाल किया था। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध धन से बड़ी संख्या में आधुनिक स्कूलों का निर्माण किया जा सकता है।
हालांकि, पीएम केयर्स फंड का गठन आपातकालीन परिस्थितियों और आपदा राहत के लिए किया गया था। इसके इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले भी बहस होती रही है।
भाजपा ने आरोपों को बताया राजनीतिक प्रोजेक्ट
सीजेपी के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि पीएम केयर्स फंड का उद्देश्य आपातकाल और आपदा राहत है। भाजपा की गोवा इकाई ने सीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए पार्टी को आम आदमी पार्टी का ‘पॉलिटिकल प्रोजेक्ट’ बताया। भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक मुद्दा खड़ा करने के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहा है।
फिलहाल, मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव और सरकारी स्कूलों की सुविधाओं को लेकर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर केंद्रित हो गई है।


