मोदी कैबिनेट में विस्तार की अटकलें तेज, टीएमसी के बागियों को भी मिल सकती है जगह
मानसून सत्र से पहले मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज है। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों वाली एनसीपीआई को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।

नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में बड़े कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हुए सांसदों को केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व मिल सकता है। माना जा रहा है कि सुदीप बंद्योपाध्याय और शर्मिला सरकार जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है।
एनसीपीआई बन सकती है एनडीए की बड़ी सहयोगी
सूत्रों का दावा है कि टीएमसी के करीब 20 बागी सांसद एनसीपीआई के साथ जुड़ चुके हैं और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अलग दल के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है। यदि उन्हें औपचारिक मान्यता मिलती है, तो एनसीपीआई राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का प्रस्ताव दे सकती है।
राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, ऐसा होने पर एनसीपीआई भाजपा के बाद एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन सकती है। वर्तमान में यह स्थान तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के पास है, जिसके लोकसभा में 16 सांसद हैं। वहीं जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के 12 सांसद हैं और दोनों दलों को केंद्र सरकार में दो-दो मंत्री पद मिले हुए हैं।
मानसून सत्र से पहले बड़ा फेरबदल संभव
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश समेत कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बड़े बदलाव कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी बार-बार मंत्रिमंडल में बदलाव करने के पक्षधर नहीं रहे हैं। पिछली सरकार में भी उन्होंने कार्यकाल के मध्य में व्यापक फेरबदल किया था। इसी वजह से इस बार होने वाला संभावित विस्तार काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नौ पद खाली, कई मंत्रियों पर नजर
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं। फिलहाल प्रधानमंत्री सहित कुल 72 मंत्री हैं, जिससे नौ पद अभी खाली हैं। इसके अलावा कुछ राज्यमंत्रियों को राज्यों में नई जिम्मेदारियां मिलने के कारण उनके पद भी खाली हो सकते हैं।
सूत्र बताते हैं कि कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा भी चल रही है। उत्तर प्रदेश चुनाव और पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। ऐसे में आगामी कैबिनेट विस्तार को 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।


