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CM एमके स्टालिन ने DMK प्रत्याशियों की सूची जारी की; 234 में 164 सीटों पर लड़ेगी पार्टी

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे की घोषणा कर दी है। इस बार के समीकरण बेहद चौंकाने वाले हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम (OPS) अब DMK गठबंधन का हिस्सा बनकर चुनाव लड़ रहे हैं। स्टालिन ने न केवल सहयोगियों को साधा है, बल्कि दिग्गजों पर भी भरोसा जताया है।

CM एमके स्टालिन ने DMK प्रत्याशियों की सूची जारी की; 234 में 164 सीटों पर लड़ेगी पार्टी
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चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी बिसात बिछ चुकी है। मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने गठबंधन सहयोगियों के बीच सीटों के बंटवारे का एलान कर दिया है। कुल 234 विधानसभा सीटों में से डीएमके खुद 164 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, कांग्रेस को 28 सीटें दी गई हैं। इस एलान के साथ ही स्टालिन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी पार्टी की मजबूत पकड़ को बरकरार रखना चाहते हैं।

इस बार सबसे बड़ा उलटफेर डीएमडीके को लेकर देखने को मिला है। पार्टी को 10 सीटें आवंटित की गई हैं। अन्य सहयोगियों में वीसीके को 8, सीपीआई और सीपीआई-एम को 5-5 सीटें, जबकि एमडीएमके को 4 सीटें मिली हैं। मुस्लिम मतदाताओं के बीच पैठ रखने वाली पार्टी आईयूएमएल और एमएमके को 2-2 सीटें दी गई हैं। एमजेके और एसडीपीआई को 1-1 सीट दी गई हैं।

बोडिनायकन्नूर से चुनाव लड़ेंगे पनीरसेल्वम

इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा ओ पनीरसेल्वम की हो रही है। कभी एआईएडीएमके के कद्दावर नेता रहे पनीरसेल्वम अब डीएमके गठबंधन की ओर से बोडिनायकन्नूर से चुनावी मैदान में उतरेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टालिन ने पनीरसेल्वम को अपने पाले में लाकर दक्षिण तमिलनाडु के 'मुकुलथोर' वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाने की तैयारी कर ली है।

डीएमके ने दिग्गजों पर फिर जताया भरोसा

उम्मीदवारों की इस सूची में अनुभवी चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। अरुप्पुकोट्टई से पार्टी के दिग्गज केकेएसएसआर रामचंद्रन को फिर से उतारा गया है, जबकि कन्याकुमारी सीट से महेश और पलयमकोट्टई से वहाब पर पार्टी ने दांव लगाया है।

मुख्यमंत्री स्टालिन का यह फैसला बताता है कि वह विकास के 'द्रविड़ मॉडल' के साथ-साथ मजबूत सामाजिक समीकरणों के जरिए सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रहे हैं। विपक्षी खेमे में इस बड़ी घोषणा के बाद खलबली मचना तय है। स्टालिन ने चुनाव से काफी पहले ही अपनी सेना और मोर्चेबंदी तैयार कर ली है।


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