पेट्रोल और दूध के बाद नए संकट की बारी, भारत में दवाएं होंगी महंगी; देखें लिस्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद और विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों का आह्वान किया है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ रहा है।

दवा उद्योग का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के बाद कई रसायनों और कच्चे माल की कीमतों में 200 से 300 फीसदी तक उछाल आया है। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री और परिवहन लागत भी बढ़ गई है। सरकारी अधिकारियों और दवा उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक इस मुद्दे पर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, फार्मास्यूटिकल्स विभाग और वाणिज्य मंत्रालय के बीच चर्चा चल रही है।
ये दवाएं होंगी महंगी
सूत्रों के मुताबिक राहत की बात यह है कि सरकार इस बढ़ोतरी को स्थायी नहीं रखेगी। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात सुधरेंगे और आपूर्ति सामान्य होगी को बढ़ी हुई कीमतों को वापस ले लिया जाएगा। प्रस्ताव में शामिल दवाओं में एंटीबायोटिक्स (एमॉक्सिसिलिन, एजिथ्रोमाइसिन), हृदय रोग की दवाएं (एम्लोडिपाइन, एटोरवास्टेटिन), दर्द निवारक (पैरासिटामोल), स्टेरॉयड (डेक्सामेथासोन) और विटामिन (एस्कॉर्बिक एसिड) जैसी अन्य दवाएं शामिल हैं।
दो बार बढ़ चुके पेट्रोल के दाम
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई। एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए गए थे। ईंधन के दाम बढ़ने के बाद नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गई जो पहले 97.77 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं डीजल की कीमत 90.67 रुपये से बढ़कर 91.58 रुपये हो गई। ये दोनों मूल्य वृद्धि मार्च में घोषित उत्पाद शुल्क कटौती के साथ ही सरकार के ईंधन की खपत को कम करने और देश के तेल आयात बिल को नियंत्रित करने के उपायों के साथ हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद और विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों का आह्वान किया है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ रहा है और लगातार तीसरे वर्ष चालू खाते का घाटा बढ़ने का खतरा है। भारत के पास पर्याप्त स्टॉकपीटीआई भाषा के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है।
शर्मा ने कहा कि भारत का मासिक डीजल उत्पादन लगभग एक करोड़ टन है, जबकि खपत लगभग 85 लाख टन है। खाना पकाने की गैस की आपूर्ति के बारे में उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाया है।शर्मा ने कहा, 'हम आयात पर निर्भर देश हैं। हम एलपीजी की 60 प्रतिशत मांग आयात के जरिये पूरा करते हैं और इसमें से 90 प्रतिशत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आती है, जो पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण लगभग बंद है।


