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महंगी होंगी दवाएं! सरकार ने दी दाम बढ़ाने की मंजूरी, ईरान-इजरायल युद्ध का असर या कुछ और

आम लोगों की जेब पर एक और असर पड़ने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स और अन्य जरूरी दवाओं के दाम बढ़ने जा रहे हैं। सरकार ने आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (NLEM) में शामिल दवाओं की कीमतों में करीब 0.6% तक बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है।

महंगी होंगी दवाएं! सरकार ने दी दाम बढ़ाने की मंजूरी, ईरान-इजरायल युद्ध का असर या कुछ और
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नई दिल्ली। देशभर में दवाओं के दाम बढ़ने जा रहे हैं। सरकार ने दवाइयों की कीमतों में करीब 0.65% तक बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है। 2025 के लिए Wholesale Price Index (WPI) के आधार पर दवाओं की कीमतों में इजाफा करने की अनुमति दी गई है। यह आदेश नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) की ओर से जारी किया गया है।

इसके मुताबिक, दवा कंपनियां अब तय फॉर्मूले के अनुसार MRP बढ़ा सकती हैं, और इसके लिए उन्हें सरकार से अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी इसे समझें तो अब कुछ जरूरी दवाइयां थोड़ी महंगी हो सकती हैं, क्योंकि कंपनियों को सालाना महंगाई के हिसाब से कीमत बढ़ाने की छूट मिल गई है।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने बताया, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार विभाग में आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आंकड़ों के आधार पर, वर्ष 2025 के दौरान वर्ष 2024 की समान अवधि की तुलना में WPI में वार्षिक बदलाव (+) 0.64956% है। समायोजित कीमतें NLEM की 1,000 से अधिक दवाओं पर लागू होंगी।

कौन-कौन सी प्रमुख दवाओं पर पड़ेगा असर

सूचीबद्ध (नियंत्रित) दवाओं के दामों में बदलाव की अनुमति साल में एक बार दी जाती है। आवश्यक दवाओं की सूची में पेरासिटामोल, बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन, खून की कमी (एनीमिया) की दवाएं, विटामिन और खनिज (मिनरल) जैसी दवाएं शामिल हैं। कोविड-19 के मध्यम से गंभीर रोगियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं और स्टेरॉयड भी इस सूची में हैं। फार्मा उद्योग के एक अधिकारी के अनुसार, यह मामूली बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब ईरान युद्ध के कारण बढ़ती इनपुट यानी कच्चे माल की लागत ने उद्योग के मुनाफे के मार्जिन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

पैरासिटामोल में 25% और सिप्रोफ्लोक्सासिन में 30% बढ़ोतरी

उद्योग विशेषज्ञों ने बताया है कि चल रहे युद्ध के कारण कुछ प्रमुख एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रिएंट्स (APIs) और सॉल्वैंट्स के दाम काफी बढ़ गए हैं और यह बढ़ोतरी मुश्किल से ही कोई राहत देगी। उदाहरण के लिए, पिछले कुछ हफ्तों में APIs की कीमतों में औसतन 30-35% की वृद्धि हुई है। उद्योग अधिकारियों ने बताया कि ग्लिसरीन की कीमत 64% बढ़ गई है, जबकि पैरासिटामोल की कीमत 25% और सिप्रोफ्लोक्सासिन की कीमत 30% बढ़ गई है। पॉलीविनाइल क्लोराइड और एल्युमीनियम फॉयल जैसी पैकेजिंग सामग्री की कीमत में भी 40% की वृद्धि हुई है।

फार्मा लॉबी ने क्या कहा

एक फार्मा लॉबी समूह के प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ग्लिसरीन, प्रोपलीन ग्लाइकॉल, और हर लिक्विड दवा जैसे सिरप, ड्रॉप्स में इस्तेमाल होने वाले सॉल्वैंट्स महंगे हो गए हैं। इंटरमीडिएट्स के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। इसे देखते हुए, हमें इससे बेहतर बढ़ोतरी की जरूरत है और हम NPPA के सामने अपना पक्ष रखेंगे।


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