कांशीराम के महापरिनिर्वाण दिवस पर मायावती ने की भारत रत्न की मांग, कहा- कुछ लोगों का फीलगुड विकास नहीं
कांशीराम के महापरिनिर्वाण दिवस पर मायावती ने श्रद्धांजलि देते हुए समान अधिकार, जनकल्याण और युवाओं के रोजगार पर जोर दिया। उन्होंने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग भी उठाई।

कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग
मायावती ने केंद्र सरकार से कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक परिवर्तन के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। मायावती ने कार्यकर्ताओं से उनके विचारों और संघर्ष को आगे बढ़ाने की अपील करते हुए पार्टी को परिवारवाद से दूर रखने की बात भी कही।
उन्होंने कहा कि बहुजन समाज ही उनका वास्तविक परिवार है और समाज के हित, सम्मान तथा आत्मसम्मान को प्राथमिकता देना जरूरी है। मायावती ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लक्ष्य को दोहराया।
‘कुछ लोगों का फीलगुड विकास नहीं’
मायावती ने सरकार की विकास नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कुछ लोगों के बीच ‘फीलगुड’ का माहौल पैदा करने से देश की वास्तविक समृद्धि सुनिश्चित नहीं हो सकती। उन्होंने गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, अशिक्षा और सामाजिक पिछड़ेपन जैसी समस्याओं का उल्लेख किया।
बसपा प्रमुख ने स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि सरकारी नीतियों में जनकल्याण और संवैधानिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
जेन-जी और जेन अल्फा को अवसर देने पर जोर
मायावती ने युवाओं, खासकर जेन-जी और जेन-अल्फा की ऊर्जा को देश निर्माण में लगाने की जरूरत बताई। उन्होंने रोजगार, शिक्षा और विकास के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। साथ ही युवाओं में बेरोजगारी और चुनावी वादों को लेकर बढ़ती नाराजगी का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम में बसपा के वरिष्ठ पदाधिकारी और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद समेत कई नेता मौजूद रहे। मायावती ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं, महिलाओं, किसानों, व्यापारियों और अन्य वर्गों के हितों को साथ लेकर चलना जरूरी है।


