हमारी पीढ़ी मोदी-शाह से डरती थी, युवाओं ने हमें निडर होना सिखाया: मणि शंकर अय्यर
CJP आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने जंतर-मंतर पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। युवाओं की भूमिका, लोकतंत्र, पेपर लीक और सरकार-प्रदर्शनकारी वार्ता पर रखी अपनी बात।

'मैं सिखाने नहीं, सीखने आया हूं'
सभा को संबोधित करते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा कि वह प्रदर्शनकारियों को कोई सीख देने नहीं, बल्कि उनसे सीखने आए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का साहस सबसे बड़ी ताकत है और जंतर-मंतर पर जुटे युवा पूरे देश को निडर होकर अपनी आवाज उठाने का संदेश दे रहे हैं।
अय्यर ने कहा कि उनकी पीढ़ी लंबे समय तक भय के माहौल में रही। उनके अनुसार, कई लोगों को लगता था कि सरकार के खिलाफ बोलने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं ने यह दिखाया है कि लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष किया जा सकता है।
सरकार की आलोचना और लोकतंत्र पर टिप्पणी
कांग्रेस नेता ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब नागरिक बिना भय के अपनी बात रख सकें। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में असहमति की आवाजों को लेकर लोगों में आशंका का माहौल रहा है, लेकिन छात्रों के आंदोलन ने इस सोच को चुनौती दी है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार और जनता के बीच संवाद सबसे प्रभावी रास्ता होता है और किसी भी आंदोलन का समाधान बातचीत के जरिए ही निकल सकता है।
उमर खालिद और शरजील इमाम का भी किया जिक्र
अपने भाषण के दौरान अय्यर ने उमर खालिद और शरजील इमाम से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन मामलों को लेकर उनकी अपनी राय है और उन्होंने लंबी न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए चिंता जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि कानून के दायरे में रहते हुए सभी मामलों का समयबद्ध निष्पक्ष निपटारा होना चाहिए।
गांधी और नेहरू के विचारों का किया उल्लेख
मणिशंकर अय्यर ने महात्मा गांधी और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत लोगों के मन से भय को दूर करना था। उन्होंने कहा कि गांधी ने देशवासियों को अन्याय के खिलाफ अहिंसक और निर्भीक संघर्ष का रास्ता दिखाया था। अय्यर ने प्रदर्शन में शामिल युवाओं की तुलना उसी साहसिक भावना से करते हुए कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों का जागरूक रहना आवश्यक है।
पेपर लीक और आंदोलन पर भी रखी राय
पत्रकारों से बातचीत में अय्यर ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच शुरू हुई बातचीत सकारात्मक संकेत है। उनके अनुसार यदि संवाद सार्थक दिशा में आगे बढ़ता है तो समाधान निकल सकता है, अन्यथा आंदोलन जारी रह सकता है।


