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महिलाएं मूर्ख नहीं, गुमराह करना बंद करें; प्रियंका गांधी का केंद्र पर तीखा हमला

सदन में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026 गिरने के बाद प्रियंका गांधी ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार पुराना महिला आरक्षण विधेयक लाए। फिर देखते हैं कि कौन महिला विरोधी है और कौन नहीं।

महिलाएं मूर्ख नहीं, गुमराह करना बंद करें; प्रियंका गांधी का केंद्र पर तीखा हमला
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नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा प्रहार करते हुए मौजूदा स्थिति को सरकार के लिए 'काला दिन' करार दिया है। महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों के मुद्दे पर बोलते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि केंद्र को पहली बार वह झटका लगा है, जिसकी वह हकदार थी।

उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी कि अब केवल विज्ञापनों और मीडिया की चमक-धमक से जनता को और अधिक समय तक अंधेरे में नहीं रखा जा सकता।

नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि देश की महिलाओं की समस्याएं आज तेजी से बढ़ रही हैं और उनका संघर्ष गहराता जा रहा है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, महिलाएं मूर्ख नहीं हैं, वे सब कुछ देख रही हैं। सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि उनका पीआर और मीडिया हाइप अब काम नहीं आने वाला। अगर आप वास्तव में कुछ ठोस करना चाहते हैं, तो वह बिल वापस लाइए जो 2023 में सर्वसम्मति से पास हुआ था।

लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक (131वां संशोधन) 2026 गिरने के एक दिन बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। प्रियंका गांधी ने कहा कि जो विधेयक सभी दलों की सहमति के बाद 2023 में पारित किया गया था, सरकार में दम है तो उसको लागू करे। उन्होंने कहा, सरकार को पुराना महिला आरक्षण विधेयक लाना चाहिए।

सभी पार्टियां मिलकर सोमवार को ही उसे पास करवा देंगी। उन्होंने कहा, सोमवार को संसद चलाइए और पुराना विधेयक पेश करिए। हम सभी समर्थन में वोट करेंगे।

खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहा'

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सत्ता में स्थायी रूप से बने रहने के लिए महिलाओं को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की और खुद को 'महिलाओं का मसीहा' साबित करना चाहा। प्रियंका गांधी ने हाथरस, मणिपुर और महिला खिलाड़ियों के मुद्दे उठाते हुए कहा कि सरकार का महिला सशक्तिकरण का दावा ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खाता।

'राजनीतिक संतुलन बदलने की हो रही थी कोशिश'

प्रियंका गांधी ने दावा किया कि यह प्रस्ताव असल में महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि इससे राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा, 'मैं खुश हूं कि यह साफ हो गया कि विपक्ष एकजुट होकर सरकार को कैसे हराया जा सकता है।'

‘ब्लैक डे' को लेकर उन्होंने कहा कि यह दिन इसलिए मनाया जा रहा है क्योंकि पहली बार सरकार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। प्रियंका गांधी ने मांग की कि सरकार 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू करे, ताकि महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व मिल सके।

'PR से हकीकत नहीं बदलती'

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता आज सब समझती है और अब हालात पहले जैसे नहीं रहे। उन्होंने कहा, 'उन्हें अभियान चलाना है तो चलाएं, लेकिन भारत बदल चुका है। जनता का भरोसा लगातार उठ रहा है।' प्रियंका ने दावा किया कि राजनीतिक प्रचार या पीआर से सच्चाई नहीं बदली जा सकती और लोग अब फैसले जागरूक होकर ले रहे हैं।

भाजपा के महिला मोर्चा अभियान को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि जनता सब देख और समझ रही है। उन्होंने कहा, 'उन्हें अभियान चलाना है तो चलाएं, लेकिन भारत बदल चुका है। जनता का भरोसा उठ रहा है।'

'लोग उनकी क्रोनोलॉजी समझते हैं'

प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस भी यह संदेश देगी कि सरकार 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को लागू करे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि महिला मोर्चा के जरिए जो तमाशा करना है करें, लेकिन लोग उनकी क्रोनोलॉजी समझते हैं। उन्हें पहले से पता था कि यह बिल पास नहीं होगा।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि उन्होंने 'मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं' अभियान चलाकर महिलाओं को सशक्त करने की कोशिश की और उत्तर प्रदेश में 40 प्रतिशत सीटें महिलाओं को दीं, हालांकि चुनाव में केवल एक महिला उम्मीदवार ही जीत सकी।

महिला आरक्षण में अल्पसंख्यक कोटा के सवाल पर प्रियंका गांधी ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि महिला आरक्षण में ओबीसी कोटा होना चाहिए, ताकि पिछड़े वर्ग की महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व मिल सके।

भाजपा ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया

बता दें कि सदन में विधेयक गिरने के बाद भाजपा ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है। भाजपा का कहा है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल महिलाओं को उनका अधिकार नहीं देना चाहते हैं। बता दें कि लोकसभा मतों के विभाजन के दौरान 298 सांसदों ने विधेयक के समर्थन में वोट किया था। वहीं 230 ने विरोध में वोट किया। कुल 528 वोट पड़े थे। विधेयक पारित होने के लिए दो तिहाई वोटों की जरूरत थी।

इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि समर्थन के अभाव में बिल पारित नहीं किया जा सका है। इसके बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि बाकी के दो बिल भी इसी से जुड़े हुए हैं इसलिए उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। बीजेपी का कहना है कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का यह ऐतिहासिक बिल विपक्ष ने पारित नहीं होने दिया।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि टीएमसी, कांग्रेस और अन्य विरोधियों को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक बिना पर्याप्त संवाद के ही पेश कर दिया गया। जबकि मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पेशल सेशन से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। इसके अलावा विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन और जनगणना से नहीं जोड़ना चाहिए।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा था कि यह विधेयक केवल चुनाव का स्वरूप बदलने के लिए लाया गया है। वहीं टीएमसी के कल्याण बनर्जी ने कहा कि अगर सरकार विधेयक लाए कि महिलाओं को 50 फीसदी सीटों पर आरक्षण दिया जाएगा तो सारे विपक्षी तुरंत इसका समर्थन कर देंगे।सपा सांसद डिपंल यादव ने कहा कि आरक्षण के कोटे के अंदर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। ऐसे में ओबीसी और अन्य पिछड़ी जातियों की महिलाओं को उनका हक नहीं मिल पाएगा। इससे केवल सवर्ण महिला प्रत्याशियों को ही फायदा मिलेगा।


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