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लश्कर-ए-तैयबा की नई रणनीति से बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता, एआई, मार्शल आर्ट और समुद्री घुसपैठ का दिया जा रहा प्रशिक्षण

लश्कर-ए-तैयबा के नए प्रशिक्षण मॉडल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार संगठन AI, मार्शल आर्ट और समुद्री घुसपैठ जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहा है, जिस पर भारतीय एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं।

लश्कर-ए-तैयबा की नई रणनीति से बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता, एआई, मार्शल आर्ट और समुद्री घुसपैठ का दिया जा रहा प्रशिक्षण
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नई दिल्ली। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) एक बार फिर अपनी रणनीति में बड़े बदलाव करता नजर आ रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने आए नए वीडियो और खुफिया सूचनाओं से संकेत मिले हैं कि संगठन अब अपने कैडर को पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मार्शल आर्ट और समुद्री रास्ते से घुसपैठ जैसी विशेष क्षमताओं का प्रशिक्षण भी दे रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चुनौती मान रहे हैं।

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, लश्कर के वरिष्ठ कमांडर और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल राना मोहम्मद अशफाक कथित तौर पर इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी कर रहा है। सामने आए वीडियो में वह एक स्विमिंग पूल में प्रशिक्षण गतिविधियों का निरीक्षण करता दिखाई देता है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आतंकियों को जलमार्ग के जरिए घुसपैठ, सुरक्षित वापसी और कठिन परिस्थितियों में विशेष अभियान चलाने के लिए तैयार करना है।

समुद्री घुसपैठ पर विशेष फोकस

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि समुद्री मार्ग से घुसपैठ का प्रशिक्षण भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है। वर्ष 2008 में मुंबई पर हुए 26/11 के आतंकी हमले में भी आतंकियों ने समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किया था। उस हमले में आतंकियों ने एक मछली पकड़ने वाली नाव पर कब्जा कर भारत में प्रवेश किया और बाद में रबर बोट के जरिए मुंबई पहुंचे थे।

रिपोर्टों के अनुसार, लश्कर के कुछ प्रशिक्षण कार्यक्रम पाकिस्तान के मंगला डैम क्षेत्र में संचालित किए जा रहे हैं, जहां पहले भी आतंकी प्रशिक्षण से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं।

मार्शल आर्ट और शारीरिक प्रशिक्षण पर जोर

सामने आए अन्य वीडियो में युवाओं को जूडो, कराटे, ताइक्वांडो और कुश्ती जैसे मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लेते देखा गया है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की ट्रेनिंग का उद्देश्य संगठन के सदस्यों को शारीरिक रूप से अधिक सक्षम बनाना और विभिन्न परिस्थितियों में कार्रवाई के लिए तैयार करना है।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (PMML) से जुड़े मंचों के माध्यम से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वरिष्ठ आतंकी कमांडर समय-समय पर इन केंद्रों का दौरा कर प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास भी करते हैं।

AI और नई तकनीकों पर भी प्रशिक्षण

खुफिया एजेंसियों का दावा है कि संगठन अब अपने नए सदस्यों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य डिजिटल तकनीकों के उपयोग की भी जानकारी दे रहा है। एक वीडियो में कथित तौर पर राना मोहम्मद अशफाक यह कहते हुए सुनाई देता है कि आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वी आगे हैं, इसलिए संगठन के सदस्यों को भी नई तकनीकों को अपनाना होगा।

अधिकारियों के मुताबिक, इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी भी देखी जा रही है। हालांकि, प्रशिक्षण के वास्तविक स्वरूप और इसके उपयोग को लेकर एजेंसियां लगातार जानकारी जुटा रही हैं।

सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रहते हैं तो भविष्य में समुद्री घुसपैठ, साइबर हमलों और ऑनलाइन प्रचार अभियानों जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान में चल रही इन गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उन्हें संभावित सुरक्षा जोखिम के रूप में देख रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले से ही कट्टरपंथी प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। यदि इन गतिविधियों में AI जैसी आधुनिक तकनीकों का दुरुपयोग होता है, तो इससे सुरक्षा चुनौतियां और जटिल हो सकती हैं। फिलहाल एजेंसियां उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण कर रही हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठा रही हैं।


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