चीन पहुंचे किम जोंग उन, रूस के बाद अब बीजिंग से रिश्ते मजबूत करने की तैयारी
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के चीन पहुंचने की खबर है। योनहाप के मुताबिक, उन्होंने नए यालू रिवर ब्रिज से डांडोंग में प्रवेश किया। दौरे की आधिकारिक पुष्टि और मकसद फिलहाल सामने नहीं आया है।

नई दिल्ली। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के चीन पहुंचने की खबर सामने आई है। दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप ने एक अज्ञात सरकारी सूत्र के हवाले से बताया कि किम ने दोनों देशों को जोड़ने वाले नए यालू रिवर ब्रिज के रास्ते चीन के सीमावर्ती शहर डांडोंग में प्रवेश किया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय और एकीकरण मंत्रालय ने भी तत्काल इसकी पुष्टि नहीं की, जबकि उत्तर कोरिया और चीन की सरकारी मीडिया ने दौरे पर कोई जानकारी जारी नहीं की।
यदि इस यात्रा की पुष्टि होती है, तो इसे दोनों पड़ोसी देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। फिलहाल किम के चीन आने का उद्देश्य, कार्यक्रम और वहां संभावित बैठकों को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
एक दशक से ज्यादा की देरी के बाद खुला नया पुल
योनहाप की रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन ने न्यू यालू रिवर ब्रिज के जरिए चीन में प्रवेश किया। यह पुल उत्तर कोरिया और चीन के बीच सीमा पार संपर्क को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसकी निर्माण प्रक्रिया और संचालन शुरू होने में एक दशक से अधिक की देरी हुई।
पुल के खुलने से दोनों देशों के बीच परिवहन, व्यापार और आवाजाही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। चीन उत्तर कोरिया का प्रमुख आर्थिक साझेदार है, इसलिए बेहतर सीमा संपर्क का दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
रूस के साथ नजदीकी के बाद चीन पर भी नजर
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया ने रूस के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं। यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में उत्तर कोरिया पर रूस को सैनिक और हथियार उपलब्ध कराने के आरोप लगे हैं। माना जाता है कि दोनों देशों के बीच सहयोग के बदले प्योंगयांग को सैन्य तकनीक और आर्थिक सहायता मिलने की संभावनाएं बनी हैं।
दूसरी ओर, चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे अहम सहयोगी रहा है। उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था के लिए चीन के साथ व्यापार और आर्थिक संपर्क महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में किम की संभावित यात्रा को बीजिंग के साथ संबंधों को मजबूत बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, दौरे की पुष्टि और आधिकारिक एजेंडा सामने आने तक किसी खास समझौते या रणनीतिक फैसले का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
शी जिनपिंग और किम की पिछली मुलाकात पर नजर
जून में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्योंगयांग में किम जोंग उन से मुलाकात की थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, कृषि, निर्माण और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई थी। किम ने चीन के साथ संबंधों को उत्तर कोरिया की प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल बताया था।
इससे पहले सितंबर 2025 में किम बीजिंग गए थे, जहां उन्होंने शी जिनपिंग से मुलाकात की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत अन्य नेताओं के साथ सैन्य परेड में हिस्सा लिया था।
अब सबकी नजर दौरे के आधिकारिक खुलासे पर
किम जोंग उन की चीन यात्रा की खबर ऐसे समय आई है, जब उत्तर कोरिया रूस के साथ सहयोग बढ़ाने के साथ चीन से अपने पारंपरिक रिश्तों को भी बनाए रखना चाहता है। हालांकि, इस बार यात्रा का मकसद क्या है और क्या किम की शी जिनपिंग से मुलाकात होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। आधिकारिक बयान आने के बाद ही इस दौरे के राजनीतिक और आर्थिक महत्व की तस्वीर साफ हो सकेगी।


