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विजय की रैली में जान गंवाने वालों के परिजनों को अब मिलेगी नौकरी, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

करूर भगदड़ में मृत 41 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

विजय की रैली में जान गंवाने वालों के परिजनों को अब मिलेगी नौकरी, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई रोक
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नई दिल्ली। करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें राज्य सरकार के नौकरी देने के फैसले को रद्द कर दिया गया था।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट के फैसले पर रोक रहेगी। इसका मतलब है कि फिलहाल राज्य सरकार के उस निर्णय पर हाईकोर्ट के आदेश का तत्काल प्रभाव नहीं रहेगा।

हादसे की गंभीरता का सुप्रीम कोर्ट ने किया जिक्र

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया। पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि हादसे के बाद सरकार ने पीड़ित परिवारों को राहत और मुआवजा देने का फैसला किया था। अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि क्या ऐसे असाधारण मामलों में सरकार पीड़ित परिवारों को रोजगार देने का निर्णय नहीं ले सकती।

तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। राज्य सरकार ने अपने फैसले को पीड़ित परिवारों के लिए राहत और पुनर्वास के कदम के तौर पर उचित ठहराया है।

मद्रास हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया था फैसला?

मद्रास हाईकोर्ट ने इससे पहले सरकार के फैसले को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के संदर्भ में चुनौती के आधार पर रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट का कहना था कि सरकारी नौकरी में समानता और अवसर की समानता के संवैधानिक सिद्धांतों का पालन जरूरी है।

अदालत ने यह भी कहा था कि अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था सामान्य तौर पर उन सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों के लिए होती है, जिनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है। ऐसे में पहले से अनुकंपा नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के अधिकारों को नजरअंदाज करके किसी विशेष घटना के पीड़ितों को सरकारी नौकरी देना उचित नहीं होगा।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह तर्क भी दिया गया था कि पीड़ित परिवारों को पहले ही आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। साथ ही हादसे की जांच सीबीआई कर रही है, इसलिए सरकारी नौकरी देने का फैसला जांच की प्रक्रिया और संभावित गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

क्या है करूर भगदड़ मामला?

यह मामला सितंबर 2025 में तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की एक रैली के दौरान करूर में हुई भगदड़ से जुड़ा है। हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद पीड़ित परिवारों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने आर्थिक सहायता के साथ सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया।

अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व में TVK के सत्ता में आने के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से राज्य सरकार के फैसले को फिलहाल राहत मिल गई है। हालांकि, नौकरी का अंतिम अधिकार अभी तय नहीं हुआ है और मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार रहेगा।


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