कर्नाटक कैबिनेट का बड़ा फैसला: एससी वर्ग में आंतरिक आरक्षण को मिली मंजूरी, सरकारी भर्तियों में आएगी तेजी
कर्नाटक कैबिनेट ने एससी वर्ग के भीतर आंतरिक आरक्षण को मंजूरी दी और सरकारी भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए 400-पॉइंट रोस्टर प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया।

400-पॉइंट रोस्टर सिस्टम लागू होगा
नई व्यवस्था के तहत भर्ती प्रक्रिया में 400-पॉइंट रोस्टर सिस्टम अपनाया जाएगा। इससे आरक्षण के अनुपालन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। यदि किसी भर्ती में एससी के लिए तीन से कम रोस्टर पॉइंट बनते हैं, तो सभी 101 अनुसूचित जाति समुदायों को सामान्य एससी श्रेणी में प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा।
56,000 से अधिक पदों को भरने की तैयारी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन भर्ती विज्ञापनों में नई आरक्षण व्यवस्था शामिल नहीं है, उन्हें वापस लेकर संशोधित रूप में दोबारा जारी किया जाएगा। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और सुव्यवस्थित बनाना है। राज्य सरकार ने कुल 56,432 स्वीकृत पदों को जल्द भरने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही बैकलॉग पदों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। सरकार ने एससी वर्ग के भीतर विभिन्न समूहों के लिए अलग-अलग प्रतिशत तय किए हैं, ताकि सभी समुदायों को समान अवसर मिल सके। यह व्यवस्था संविधान के दायरे में रहकर तैयार की गई है।
तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित कर आरक्षण का लाभ दिया जाएगा
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, कर्नाटक की 101 अनुसूचित जातियों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित कर आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। इसमें श्रेणी-A (मादिगा और संबद्ध जातियां/दलित लेफ्ट) के लिए 5.25 प्रतिशत, श्रेणी-B (होलेया और संबद्ध जातियां/दलित राइट) के लिए 5.25 प्रतिशत और श्रेणी-C (भोवी, लम्बानी, कोरमा, कोरचा और 59 खानाबदोश समुदाय) के लिए 4.5 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि श्रेणी-C के अंतर्गत आने वाले पदों या सीटों में से 20 प्रतिशत पद अनुसूचित जातियों की 59 सबसे पिछड़ी जातियों के लिए विशेष रूप से आरक्षित रहेंगे।
कानूनी और ऐतिहासिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण
इस निर्णय के पीछे कानूनी और ऐतिहासिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। पिछली भाजपा सरकार ने अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया था, जिससे राज्य का कुल आरक्षण 56 प्रतिशत हो गया था। चूंकि यह मामला अदालत में था और उच्च न्यायालय ने इंदिरा साहनी मामले (1992) का हवाला देते हुए 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन न करने का निर्देश दिया था, इसलिए वर्तमान कांग्रेस सरकार ने 17 प्रतिशत के बजाय 15 प्रतिशत के कोटे के भीतर ही आंतरिक आरक्षण के फॉर्मूले को पुनर्गठित किया है। मुख्यमंत्री ने नौकरी के इच्छुक युवाओं के साथ इस सरकारी आदेश की प्रति भी साझा की है।


