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कर्नाटक में सरकारी बसों का सफर हुआ महंगा, किराये में 20 रुपये तक की बढ़ोतरी; जानें नई दरें

कर्नाटक में सरकारी बसों का किराया बढ़ा दिया गया है। BMTC, KSRTC सहित चार परिवहन निगमों की संशोधित दरें बुधवार मध्यरात्रि से लागू होंगी। जानें कितना महंगा हुआ सफर।

कर्नाटक में सरकारी बसों का सफर हुआ महंगा, किराये में 20 रुपये तक की बढ़ोतरी; जानें नई दरें
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बेंगलुरु। कर्नाटक में सरकारी बसों से सफर करने वाले यात्रियों को अब अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। राज्य सरकार ने चारों सरकारी परिवहन निगमों की बसों के किराये में बढ़ोतरी का फैसला किया है। परिवहन मंत्री बायरथी सुरेश ने नई दरों का ऐलान करते हुए बताया कि अलग-अलग श्रेणियों की बसों में किराया बढ़ाया गया है। संशोधित दरें बुधवार मध्यरात्रि से लागू होंगी। इस फैसले का असर खासतौर पर बेंगलुरु में रोजाना बस से यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा।

BMTC की बसों में 10 रुपये तक बढ़ा किराया

परिवहन मंत्री के मुताबिक, बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (BMTC) की साधारण बसों का न्यूनतम किराया छह रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है। वहीं अधिकतम किराया 35 रुपये से बढ़कर 45 रुपये हो गया है। यानी यात्रियों को अब टिकट के लिए पहले के मुकाबले अधिक भुगतान करना होगा।

एसी बसों के किराये में भी बढ़ोतरी की गई है। इन बसों का अधिकतम किराया 75 रुपये से बढ़ाकर 90 रुपये कर दिया गया है। वहीं केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक चलने वाली एसी बसों का अधिकतम किराया 405 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये कर दिया गया है। इस तरह एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।

KSRTC की बसों में अधिकतम 9 रुपये की वृद्धि

कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बसों के किराये में अधिकतम नौ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। परिवहन मंत्री ने बताया कि राजहंस और एसी जैसी प्रीमियम बस सेवाओं का किराया प्रतिस्पर्धी बाजार दरों को ध्यान में रखकर तय किया गया है।

मंत्री ने किराया बढ़ाने के पीछे डीजल की बढ़ती कीमतों को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी बस किराये में वृद्धि की गई है। कर्नाटक के परिवहन निगमों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

डीजल खरीदने के लिए भी नहीं थे पैसे: शिवकुमार

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने किराया बढ़ाने के फैसले का बचाव करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से परिवहन निगमों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। कुछ दिन पहले ऐसी स्थिति बन गई थी कि बसों में डीजल भरवाने के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं थे। सरकार को निगमों की मदद करनी पड़ी।

शिवकुमार के मुताबिक, यदि केंद्र सरकार ईंधन की कीमतें कम करती है तो राज्य सरकार भी बस किराये में कटौती करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले से ही महिलाओं को 'शक्ति' योजना के तहत साधारण सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दे रही है। इससे परिवहन निगमों पर वित्तीय दबाव बढ़ा है।

महंगाई पर केंद्र को घेरा, प्रदर्शनकारियों से पूछे सवाल

मुख्यमंत्री ने किराया वृद्धि के विरोध में प्रदर्शन करने वालों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, दवाइयों, खाद, सीमेंट और कीटनाशकों की कीमतें बढ़ने पर विरोध क्यों नहीं किया गया? उनके मुताबिक, परिवहन निगमों को घाटे से उबारने के लिए किराये में चरणबद्ध तरीके से दो और तीन रुपये की बढ़ोतरी भी की गई थी।

सरकार के इस फैसले से यात्रियों का खर्च बढ़ना तय है। अब देखना होगा कि किराया वृद्धि के बाद परिवहन निगमों की आर्थिक स्थिति में कितना सुधार होता है और यात्रियों को बेहतर बस सेवाएं मिल पाती हैं या नहीं।


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