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जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, 'जले हुए नोट' मिलने के बाद से थे विवादों में

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 5 अप्रैल, 2025 को ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के तौर पर शपथ ली थी।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, जले हुए नोट मिलने के बाद से थे विवादों में
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नई दिल्ली। कैश कांड मामले में नाम आने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की तैयारी चल रही थी। इसी बीच जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेजा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने शुक्रवार को ये फैसला लिया है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित तौर पर नकदी मिली थी। इसे लेकर विवाद गहरा गया और उनके खिलाफ महाभियोग की तैयारी चल रही थी।

जस्टिस वर्मा के आवास से जले और अधजले नोट मिले थे

जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से 15 मार्च 2025 को 500 रुपए के जले और अधजले नोट मिले थे। इसका एक वीडियो भी खूब वायरल हुआ था। इसके बाद न्यायमूर्ति वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और उसे साजिश बताया था। हालांकि, मामले ने तूल पकड़ा, विवाद संसद तक पहुंच गया था।

यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव

बीते साल संसद के मानसून सत्र में 145 लोकसभा सांसदों ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के लिए लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा। सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत यह कदम उठाया। इस ज्ञापन को कांग्रेस, टीडीपी, जेडीयू, जेडीएस, जनसेना पार्टी, एजीपी, शिवसेना (शिंदे), एलजेएसपी, एसकेपी, सीपीएम सहित विभिन्न दलों का समर्थन प्राप्त था।

जिन 145 सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए, उनमें अनुराग ठाकुर, रविशंकर प्रसाद, राहुल गांधी, राजीव प्रताप रूडी, पीपी चौधरी, सुप्रिया सुले और केसी वेणुगोपाल शामिल थे। 145 सांसदों ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए फैसला लिया गया कि संसद इन आरोपों की जांच करेगी। महाभियोग प्रस्ताव के तहत आगे की प्रक्रिया संसद में विचार-विमर्श और जांच के बाद तय की जाएगी।

जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच

वहीं इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश ने 22 मार्च को एक आंतरिक जांच शुरू की थी और जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीशों का पैनल भी बनाया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने जस्टिस यशवंत वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट करने की सिफारिश की थी।

इसके बाद सरकार ने इस सिफारिश पर अपनी मुहर लगाई और वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में कार्यभार संभालने के लिए कहा गया था। 5 अप्रैल को जस्टिस यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की थी। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी जस्टिस वर्मा के ट्रांसफर को लेकर सवाल उठाए गए। इस मुद्दे पर घमासान लगातार जारी था इसी बीच शुक्रवार को जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेजा है।


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