धार भोजशाला में आज नमाज और पूजा एक साथ, सिक्योरिटी के लिए 8000 जवान तैनात
धार की भोजशाला में बसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष ने सूर्योदय से पूजा शुरू की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक- दोपहर 1 से 3 बजे तक मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करेगा। सुरक्षा हेतु 8 हजार जवान और ड्रोन तैनात हैं। शोभा यात्रा के बाद धर्म सभा और गर्भगृह में महाआरती का आयोजन होगा।

भोपाल। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर धार स्थित भोजशाला में आज बसंत पंचमी का पर्व बेहद खास और संवेदनशील माहौल में मनाया जा रहा है। सूर्योदय के साथ ही हिंदू पक्ष ने मां वाग्देवी (सरस्वती) की विशेष पूजा-अर्चना शुरू कर दी है। ये पूजा सूर्यास्त तक जारी रहेगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के विशेष आदेश के तहत दोपहर 1 से 3 बजे के बीच मुस्लिम समाज परिसर में जुमे की नमाज भी अदा करेगा।
पूजा और नमाज के समय को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ (CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली) ने ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक (1 से 3 बजे के अंतराल को छोड़कर) पूर्ण पूजा की छूट दी है, जबकि मुस्लिम पक्ष को 1 से 3 बजे के बीच नमाज की अनुमति मिली है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि शांति व्यवस्था के लिए विशेष पास और अलग-अलग स्थानों की व्यवस्था की जाए।
छावनी में तब्दील हुआ धार, 8000 जवान तैनात
किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। धार शहर को छावनी में बदल दिया गया है, जहां सीआरपीएफ (CRPF), रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और स्थानीय पुलिस के 8 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं। संवेदनशील इलाकों में एआई (AI) तकनीक वाले कैमरों और ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है। श्रद्धालुओं को 13-14 राउंड की सुरक्षा बैरिकेडिंग से गुजरने के बाद ही प्रवेश मिल रहा है।
आज के प्रमुख कार्यक्रम और शोभा यात्रा
भोजशाला उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन के अनुसार, हिंदू समाज में कोर्ट के फैसले के बाद भारी उत्साह है सुबह 10:00 बजे उदाजी राव चौराहा (लालबाग) से भव्य शोभा यात्रा शुरू होगी। सुबह 11:30 बजे शोभा यात्रा मोतीबाग चौक पहुंचेगी, जहां विशाल धर्म सभा का आयोजन होगा। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार और स्वामी स्वदेशानंद जी सभा को संबोधित करेंगे।
दोपहर 12:45 बजे अतिथि और श्रद्धालु भोजशाला के गर्भगृह में प्रवेश कर महा आरती करेंगे। पूरे दिन वेदारंभ संस्कार और हवन आयोजित होगा, जिसकी पूर्णाहुति सूर्यास्त के साथ होगी। भोजशाला परिसर में वर्तमान में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है और यज्ञशाला में आहुतियां दी जा रही हैं। प्रशासन हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए है।
भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद क्या है?
भोजशाला ASI द्वारा संरक्षित एक स्मारक है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह परमार राजा भोज के वक्त से है। इस जगह पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय अपना दावा करते हैं।
मुस्लिम मान्यता: मुस्लिम समुदाय इस संरचना को सूफी संत कमालुद्दीन के नाम पर कमल मौला मस्जिद मानता है और दावा करता है कि वहां सदियों से लगातार नमाज़ पढ़ी जा रही है और इस दावे का खंडन करता है कि यह मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था।
हिंदू मान्यता: हिंदू भोजशाला को देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर मानते हैं, जिसके लिए वे संस्कृत शिलालेखों, मंदिर जैसी मूर्तियों और वास्तुकला की विशेषताओं का हवाला देते हैं और दावा करते हैं कि यहां बहुत पहले से मंदिर थी।
यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक भी है, जिसमें विरासत, पुरातत्व और पूजा की निरंतरता की अलग-अलग व्याख्याएं शामिल हैं।


